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बिजनौर में बनेगा जिले का पहला संग्रहालय

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बिजनौर में दुष्यंत कुमार पुस्तकालय परिसर में बना पुराना भवन, जिसे संग्रहालय बनाने की चल रही तैया? - फोटो : BIJNOR
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बिजनौर में बनेगा जिले का पहला संग्रहालय
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। विदुरधरा कहे जाने वाली बिजनौर की धरती पर चारों ओर पौराणिक व ऐतिहासिक इतिहास फैला है। खासतौर से महाभारत काल का बेशकीमती इतिहास समय-समय पर हुई खोदाई में जिले के कई हिस्सों में मिला है। यह दुर्भाग्य रहा कि उसे एक स्थान पर संजोया नहीं जा सका, इस कारण अधिकांश लोग इससे अनभिज्ञ ही रहे। अब पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन ने जिले के इस गौरवशाली इतिहास को एक जगह पर संजोने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। दुष्यंत कुमार पुस्तकालय परिसर में एक पुराना भवन है। इस भवन को पुरातत्व विभाग ने संग्रहालय में बदलने की संभावना जताई है। डीएम उमेश मिश्रा ने पुरातत्व विभाग के सुझाव पर इस संभावना को धरातल पर उतारने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
बिजनौर में हर तरफ ऐतिहासिक और पौराणिक इतिहास है। फिर चाहे विदुरकुटी हो या फिर मालन किनारे राजा मोरध्वज का किला। अब बढ़ापुर के पास पत्थरगढ़ का किला भी पुरातत्व विभाग की नजर में आ गया है। इन सभी जगहों का अपना ऐतिहासिक महत्व है। यहां से काफी संख्या में दुर्लभ मूर्तियां निकल चुकी हैं। अभी तक जिले में संग्रहालय न होने के कारण इन मूर्तियों को एक जगह पर एकत्रित नहीं किया जा सका, जिस कारण जिले के लोग अपने जिले के गौरवशाली इतिहास से अनभिज्ञ हैं। कुछ मूर्तियां मथुरा मोर गांव में स्थित मयूरेश्वर मंदिर में रखी हैं तो कुछ अन्य जगहों पर हैं।
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अब पुरातत्व विभाग ने इस मूर्तियों को एक स्थान पर रखने की कवायद शुरू की है। इसके लिए जिला मुख्यालय पर संग्रहालय बनाने की तैयारी हो रही है। दुष्यंत कुमार पुस्तकालय परिसर में स्थित पुराने भवन को संग्रहालय का रूप दिया जा सकता है। पुरातत्व के अफसरों ने अंग्रेजी शासनकाल के दौरान बने इस भवन को संग्रहालय का रूप देने की संभावना जताई है और डीएम उमेश मिश्रा से इस पर चर्चा भी की है। सब कुछ ठीक रहा तो शीघ्र ही यह भवन संग्रहालय का रूप ले लेगा। लोग यहां पहुंचकर अपने जिले के इतिहास के बारे में जान पाएंगे।
मूर्तियों के साथ लिखा जाएगा उनका इतिहास
संग्रहालय भवन में जिले में मिलने वाली दुर्लभ मूर्तियां और अन्य सामान के साथ उसके इतिहास के बारे में भी बताया जाएगा। यह वस्तु कहां मिलीं और उसका ऐतिहासिक क्या महत्व है, इसके बारे में भी लोग जान पाएंगे। साथ ही इस पुराने भवन का जीर्णोद्धार और देखरेख भी हो जाएगी। कुछ समय पहले ही यहां पर दुष्यंत कुमार पुस्तकालय तैयार हुआ है। इसके जीर्णोद्धार के साथ-साथ हिंदी गजलकार दुष्यंत कुमार को यह समर्पित किया गया। यहां पर पढ़ाई करने आने वालों के लिए किताब से लेकर बैठने तक की व्यवस्था हुई तो यहां पर आने वालों की संख्या भी बढ़ गई।
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पुरातत्व विभाग से आई टीम ने दुष्यंत कुमार पुस्तकालय परिसर में बने पुराने भवन का निरीक्षण किया है। टीम ने यहां पर संग्रहालय की संभावना जताई है। प्रयास है कि इसे संग्रहालय का रूप दिया जा सके, इसके लिए पुरातत्व विभाग के अफसरों से भी वार्ता चल रही है। ऐसा होने पर जिले में मिलने वाली ऐतिहासिक और पौराणिक वस्तुओं को संग्रहालय में रखवाया जा सकेगा। इससे इनका संरक्षण तो होगा ही, साथ ही जिले के लोग जिले के इतिहास को नजदीक से जान पाएंगे - उमेश मिश्रा, डीएम बिजनौर
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