कादराबाद/बिजनौर। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कच्ची जमीन पर निवास व खेती कर रहे विस्थापितों को मालिकाना हक दिलाने के संबंध में प्रमुख सचिव राजस्व व डीएम ने गांव मदपुरी पहुंचकर ग्रामीणों से वार्ता की।
गांव का निरीक्षण कर पृष्ठभूमि की जानकारी की। इससे पूर्व बृहस्पतिवार की शाम प्रमुख सचिव ने जिले के अधिकारियों के साथ संबंधित गांवों का राजस्व रिकॉर्ड देखा। शुक्रवार को गांवों में पहुंचे प्रमुख सचिव राजस्व रणवीर प्रसाद व डीएम जसजीत कौर ने जीजीआईसी में ग्रामीणों से बात की।
बलदेव सिंह, मंगतराम, पूरण सिंह, बूटाराम, भजन सिंह, सतपाल सिंह ने बताया कि वे चार पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद से गांव मदपुरी, भोगपुर, कुआं खेड़ा आदि गांव में बसे थे लेकिन उन्हें जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला है।
प्रमुख सचिव ने ग्रामीणों को बताया कि जो क्षेत्र वर्तमान में वन, जंगल या झाड़ी में दर्ज है। आवंटन योग्य श्रेणी का विकल्प रहेगा। इसके चलते ग्रामीण चाहें तो वर्तमान स्थान को छोड़कर आसपास के गांव में अपना विकल्प चुन सकते हैं जबकि ग्रामीणों ने जो जहां बसा हुआ है, वहीं पर उसे मालिकाना हक दिलाने की अपील की।
ग्रामीणों ने बताया कि मकान व खेती की जमीन सहित तमाम संसाधनों के होने के बावजूद न तहसील से उन्हें फर्द मिलती है और न ही बैंक उन्हें ऋण देता है।
इसके अलावा ग्रामीणों ने कालागढ़ से कुआंखेड़ा व भोगपुर मार्ग बनवाने की मांग की है। इस दौरान एडीएम विनय कुमार, एसडीएम नगीना नवीन कुमार, डीएफओ नजीबाबाद अभिनव राज व क्षेत्रीय लेखपाल बेनीराम रहे।
प्रमुख सचिव ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बंटवारे के बाद बसे शरणार्थियों को कच्ची जमीनों के मालिकाना हक दिलाने के संबंध में धामपुर तहसील के 12 तथा नगीना तहसील के आठ गांवों का निरीक्षण कर कानूनी प्रक्रिया की जानकारी की है।
ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं भी बताई हैं। समस्याओं से संबंधित रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी। साथ ही जल्द ही ग्रामीणों को मालिकाना हक दिलाने का प्रयास किया जाएगा।