ढेला गांव इको सेंसेटिव जोन में दर्शाया, आरटीआई से हुआ खुलासा
कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क प्रशासन ने ढेला गांव को इको सेंसेटिव जोन में दर्शाया है। यह खुलासा आरटीआई में मांगी गई सूचना से हुआ। ग्रामीणों में विभाग के प्रति रोष है। ग्रामीणों ने पार्क के अधिकारियों से मांग की है कि गांव को राजस्व गांव में ही बने रहने दिया जाए। उसे इको सेंसेटिव जोन से बाहर किया जाए।
किसान संघर्ष समिति के सह संयोजक महेश जोशी ने बताया कि उन्होंने कार्बेट टाइगर रिजर्व के कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत कार्बेट टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल, बफर जोन एवं कोर जोन के क्षेत्रफल, ग्रामीणों को हक हकूक बंद किए जाने की तिथि एवं शासनादेश तथा ढेला गांव को इको सेंसेटिव जोन से बाहर रखने के शासनादेश की मांग की थी। जिस कार्बेट टाइगर रिजर्व के सूचना अधिकारी जेसी तिवारी ने जो सूचना दी उससे ग्रामीणों में हड़कंप मचा है। जिसमें अन्य सूचनाओं के अलावा कार्बेट नेशनल पार्क के आरक्षित वनक्षेत्र चक, कार्बेट नेशलन पार्क और सोना नदी वन्यजीव अभ्यारण्य के चारों ओर राजस्व गांव ढेला, बंदोबस्ती को इको सेंसेटिव जोन में दर्शाया गया है।
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ग्रामीणों में फैला रोष
मामले की सूचना मिलते ही कार्बेट पार्क एवं आसपास क्षेत्र के लोगों में रोष फैल गया है। किसान संघर्ष समिति के सह संयोजक महेश जोशी, इको सेंसेटिव जोन विरोधी संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ललित उप्रेती, कमल अधिकारी, किशन शर्मा, ललिता रावत, तुलसी जोशी ने कहा है कि गांव को इको सेंसेटिव जोन के दायरे से बाहर किया जाए। इससे ग्रामीणों के हक हकूक प्रभावित हो सकते है। ग्रामीण पहले ही इस योजना का विरोध करते रहे हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि समय रहते जनता के हितों को देखते हुए गांव को इको सेंसेटिव जोन से बाहर नहीं किया गया तो जनता सड़कों पर उतरेगी।