बिजनौर में गांव शाहपुर भसौड़ी के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक दंपति की नियुक्ति का मामला गांव वालों द्वारा उठाने के बाद अब विभाग के अधिकारी ही दंपति के बचाव में उतर रहे हैं। एक साल से अनुपस्थित चल रही शिक्षिका को बचाने के लिए अब मेडिकल सर्टिफिकेट का सहारा लेने की कोशिश की जा रही है। गांव वालों ने इसकी शिकायत बीएसए से करते हुए बीईओ जलीलपुर को जांच से अलग रखने की मांग की है।
ब्लॉक जलीलपुर के गांव शाहपुर भसौड़ी के प्राथमिक विद्यालय में दिग्विजय व उनकी पत्नी अनीता शिक्षक थे। दिग्विजय को स्कूल में एक साल के लिए समायोजित किया गया था, लेकिन वे पांच साल तक इसी विद्यालय में जमे रहे। उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर अपनी पत्नी अनीता को भी सहायक अध्यापक पद पर ही स्कूल में नियुक्ति दिला दी। ग्राम प्रधान राजेश्वरी देवी व बाकी गांव वालों ने बीएसए से की शिकायत में कहा था कि अनीता आज तक स्कूल नहीं आई हैं। यहां तक कि उनकी ज्वाइनिंग के समय उनके हस्ताक्षर पति दिग्विजय ने किए थे। शिकायत होने पर विभाग में हड़कंप मच गया था। विभाग ने मामले की लीपापोती करते हुए दिग्विजय का समायोजन रद्द कर दिया, लेकिन दिग्विजय को प्राथमिक विद्यालय के कैंपस में ही स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में नियुक्त किया है।
अनीता भी 27 फरवरी से स्कूल आने लगी हैं। गांव वालों के मुताबिक अब अनीता को बचाने के लिए फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का सहारा लिया जा रहा है। गांव वालों ने इस प्रकरण में बीईओ जलीलपुर कार्यालय की भूमिका संदिग्ध बताई है। गांव वालों ने बीईओ जलीलपुर को जांच से अलग रखने की मांग की है। भगवानदास, मलखान, धर्मेंद्र, वीर सिंह, जयप्रकाश आदि ने मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।