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Bijnor News: निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रभावी नियंत्रण की मांग

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किरतपुर। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन तीन महीने की अग्रिम फीस के साथ किताब-कॉपी और यूनिफार्म और बिल्डिंग फीस के नाम पर भारी रकम वसूल रहे हैं।
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अभिभावकों का कहना है कि अधिकांश स्कूल अपनी तय पब्लिकेशन की किताबें ही खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, जो केवल चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध होती हैं। इससे किताबों के दाम बाजार से दोगने से अधिक हो जाते हैं। एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए सत्र को लेकर स्कूलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
अभिभावक शोभित अग्रवाल का कहना है कि महंगे कोर्स के कारण परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से स्कूलों पर नियंत्रण रखने और अभिभावकों को कहीं से भी किताब-कॉपी खरीदने की छूट देने की मांग की।
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अमित गोयल का कहना है कि सरकार को फीस, ड्रेस और कोर्स की कीमतों पर सख्त नियंत्रण करना चाहिए। अभिभावक मनोज अग्रवाल ने भी मांग की कि स्कूलों द्वारा एक ही दुकान से किताब और ड्रेस खरीदने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
अभिभावकों का यह भी कहना है कि अब स्कूलों द्वारा सप्ताह में अलग-अलग ड्रेस लागू की जा रही है, जिससे खर्च और बढ़ गया है। बढ़ती महंगाई के बीच बच्चों की शिक्षा परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। सरकार की सख्ती के बावजूद निजी स्कूलों की मनमानी पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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