डेयरी विकास निधि से लाभान्वित किसानों का मांगा ब्योरा
बिजनौर। सांसद मलूक नागर ने 17 वीं लोकसभा के छठे सत्र के दौरान डेयरी प्रसंस्करण एवं अवसंरचना विकास निधि के अंतर्गत गांवों में दुग्ध उत्पादक लाभान्वित किसानों का ब्योरा मांगा। उन्होंने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र सहित डेयरी प्रसंस्करण एवं अवसंरचना विकास निधि के अंतर्गत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) को दी गई 440 करोड़ की पहली किस्त में से डेयरी किसानों की आय दोगुनी करने के लिए व्यय और उपयोग की गई राशि की जानकारी मांगी।
सांसद ने इसके अलावा इससे लाभान्वित होने वाले किसानों की और उक्त वित्तीय सहायक योजना के अंतर्गत दुग्ध संस्थाओं को ऋण के रूप में प्रदान की गई धनराशि का मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री से मांगा था। जवाब में सरकार ने बताया कि डेयरी प्रसंस्करण और अवसंरचना विकास निधि (डीआईडीएफ) के अंतर्गत 30 जून 2021 तक कुल 24 हजार 120 गांवों को कवर किया गया है। बिजनौर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के लिए कोई परियोजना प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा सहकारी दुग्ध संघों को प्रथम किस्त के रूप में 440 करोड़ रुपये की संपूर्ण राशि संवितरित की गई है और इससे 10 लाख 65 हजार 580 किसान लाभान्वित हुए हैं। कुल 11 हजार 184 करोड़ रुपये की परियोजना लागत में से 8004 करोड़ रुपये अंतिम उधारकर्ताओं को प्रदान की जाने वाली ऋण सहायता है। डीआईडीएफ योजना के तहत भारत सरकार 11 सितंबर 2020 से प्रतिवर्ष 2.5 प्रतिशत की दर से नियत ब्याज सहायता प्रदान करती है। जिस पर सांसद का कहना है कि उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए दुग्ध सहकारी समितियों को दूध की गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की जरूरत है।