‘बेटियाें को शिक्षित और स्वावलंबी बनना ही होगा’
चांदपुर। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत किसान इंटर कॉलेज केलनपुर में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर विचार व्यक्त किए। बेटियों को नारी गरिमा के प्रति जिम्मेदार और संवेदनशीलता से काम करने की शपथ दिलाई गई। कहा कि बेटियां अपने बलबूते पर स्वावलंबी बने ।
विद्यालय के प्रधानाचार्य जगदीश प्रताप सिंह ने कहा कि आज के युग में बेटी को बचाने एवं उसे शिक्षित कर समाज में उत्तम स्थिति प्रदान करने के लिए समाज को अपनी मानसिकता बदलनी होगी। यह सभी के प्रयास से ही यह संभव है। बेटियों करे धैर्यवान, शीलवान एवं साहसी होना चाहिए। उन्हें हर परेशानी का सामना साहस करना चाहिए।
विद्यालय के प्रबंधक खूब सिंह ने कहा कि सरकार बेटियों को स्वावलंबी बनाने के लिए प्रयत्नशील है। सभी को बेटियों को शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए आगे आना होगा। इससे बेटियों को उनका अधिकार मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा के लिए स्वास्थ्य का अच्छा होना भी जरूरी है। सभी को अपने स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन लालमल सिंह ने किया।
शिक्षिका प्रमोद देवी ने कहा कि बेटे तो भाग्य से प्राप्त होते हैं पर बेटियां तो सौभाग्य से प्राप्त होती हैं। जिस घर में बेटियां नहीं उस घर का तो कोई भाग्य ही नहीं होता। उन्होंने कहा कि बेटियां परिवार के लिए भाग्यवान होती हैं।
शिक्षिका अंजली तोमर ने कहा कि बेटी भार नहीं होती है। बेटियों का जीवन उनका अधिकार है। शिक्षा के प्रति उनका जीवन अधूरा है। बेटियां को शिक्षित बनाने पर परिजन पूरा जोर। बेटियां तभी कोई मुकाम हासिल कर सकती हैं।
बेटी बिना घर अधूरा
शिक्षिका रजनी देवी ने कहा कि अगर बेटी ही नहीं होगी तो कैसे त्यौहार मनाओगे। बेटी से ही होता है घर पूरा होता है। दिन पर दिन बेटियों की संख्या कम होती जा रही है। इसे रोकने की जरूरत है।
खूब हंसाती हैं बेटियां
शिक्षिका रेसू सिद्धू ने कहा कि बेेटे तो हजारों फरमाइश करते है, पर समय की नजाकत को बेटियां ही समझती है। बेटे खूब रुलाते हैं, पर बेटियां ऐसी होती है। जो खूब हंसाती हैं।
बेटियों से ही समाज रहेगा अच्छा
शिक्षिका अक्षिता ने कहा कि जो लोग भ्रूण हत्या करते हैं। उसे रोकने की जरूरत है। ऐसे लोगों को समझने की जरूरत है, बेटियां होंगी तब समाज भी अच्छा होगा।
अत्याचार न सहे बेटियां
शिक्षिका कोकिल ने कहा कि कोई व्यक्ति किसी बेटी के साथ छेड़छाड़ करता है तो उसका विरोध कर इसकी सूचना पुलिस व परिजनों को देनी चाहिए। अन्यथा आरोपी का हौसला बढ़ेगा।
छात्रा शाल्वी तोमर ने कहा कि बेटियों को समाज में बेटों के समान अधिकार एवं सुरक्षा मिलनी चाहिए। समाज बेटियों का भी उसी प्रकार सम्मान करे। जिस प्रकार बेटों का करते हैं। उन्हें शिक्षा के लिए पूरी छूट दी जानी चाहिए।
बोझ नहीं भविष्य है बेटी
छात्रा पल्लवी तोमर ने कहा कि बेटी बोझ नहीं भविष्य है। बेटी हर लड़ाई जीत कर दिखा सकती है। बेटी है तो कल है। उन्होंने कहा कि बेटियों को समाज में पूरा सम्मान मिलना चाहिए।
अधिकारों के प्रति जागरूक होना जरूरी
छात्रा निशा यादव ने कहा कि बेटियों को अपने अधिकार पाने के लिए अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी है और यह तब हो सकता है जब बेटियां शिक्षित होंगी।
सभी को एक जैसा मिले सम्मान
छात्रा शिवांगी तोमर ने कहा कि समाज में दोहरी मानसिकता के कारण कई प्रकार से महिलाओं का उत्पीड़न होता है। सभी को बेटा हो या बेटी समान अधिकार मिलने चाहिए।
बेटी भी बन सकती हैं काबिल
छात्रा नीति देवल ने कहा कि लड़कियों को पढ़ाना चाहिए। और समाज में चल रही दहेज प्रथा को समाप्त करना चाहिए। बेटी है तो कल है। उन्होंने कहा कि बेटे एवं बेटी में अब अंतर नहीं समझना चाहिए। बेटी भी बेटों की तरह काबिल बन सकती है।
बेटियां पढ़ेंगी तो देश आगे बढे़गा
छात्रा नेहा यादव ने कहा कि बेटियां पढ़ेगी जब ही देश आगे बढ़ेगा। इसलिए बेटियों का शिक्षित होना बहुत जरूरी है।