नूरपुर में अमर उजाला फाउंडेशन के मिशन अपराजिता अभियान के अंतर्गत न्यादरी देवी कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राओं ने नारी सशक्तिकरण पर नुक्कड़ नाटक और कविताएं प्रस्तुत कर भ्रूण हत्या रोकने एवं बेटियों को बेटों के समान समझकर उन्हें उच्च शिक्षा देने का संदेश दिया। इस अवसर पर बेटियों को अपने हुनर के बलबूते आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
अमर उजाला फाउंडेशन के मिशन अपराजिता कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्या अमिता सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि बेटियों ने कड़ी मेहनत और लगन से समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है। महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है। सेना से लेकर अंतरिक्ष तक महिलाओं ने सफलता के झंडे गाढ़ रखे हैं। हमारे देश में पुरातन काल से ही नारी को उच्च स्थान दिया गया है। इतिहास में भी नारियों के शौर्य की कई गाथाएं लिखी हुई हैं। नारी हमेशा से ही अपराजित रही है। उन्होंने अमर उजाला के अपराजिता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि समाज के लोगों को नारी सुरक्षा और सम्मान के लिए आगे आना चाहिए। कार्यक्रम में विद्यालय की सभी छात्राओं एवं शिक्षिकाओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। इस मौके पर छात्राओं ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ शीर्षक पर लघु नाटिका प्रस्तुत की। छात्राओं ने नाटक के माध्यम से संदेश दिया कि समाज में कुछ स्थानों पर बेटियों को अभी बोझ समझा जाता है, लेकिन वर्तमान में बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। नाटक के माध्यम से कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों पर जमकर प्रहार किया। छात्राओं ने भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों को जड़ से खत्म कर बेटियों को बेटों के समान उच्च शिक्षा दिलाने एवं उन्हें समान रूप से आगे बढ़ने का संदेश दिया।
बेटियों को समान अवसर दें
प्रधानाचार्या अमिता सिंह ने कहा कि बेटियां समाज का गौरव हैं। आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नही हैं। बस केवल उन्हें उच्च शिक्षा दिलाकर समान रूप से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।
नारी हमेशा से है पूजनीय
उप प्रधानाचार्य प्रथमा चौहान ने कहा कि नारी हमेशा से ही पूजनीय रही है। प्राचीनकाल से लेकर आज तक नारियों ने हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाढ़े हैं। समाज के लोगों को नारी सम्मान और सुरक्षा के लिए आगे आकर लोगों को जागरूक करना चाहिए।
स्वयं भी करें सम्मान
शिक्षिका प्रीति चौहान का कहना है कि जिस समाज में नारियों का सम्मान हुआ है। उसी समाज की तरक्की हुई है। उन्होंने बताया कि अपराजिता का मतलब है जिसे कभी जीता न जा सके। इसलिए हम सभी कह सकते हैं कि नारी तु नारायणी यानि कि नारी में लक्ष्मी है।अत: हम सबको नारी का स्वयं भी सम्मान करना चाहिए और बच्चों में इस प्रकार के संस्कार देने चाहिए।
बेटों और बेटियों में न हो भेदभाव
शिक्षिका चूड़ामणि ने कहा कि बेटा बेटी में भेद करने वाले लोगों को जागरुक करने की जरूरत है। उन्हें समझना चाहिए कि बेटियों ने हमेशा ही अपने माता-पिता का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने समाज के प्रबुद्ध लोगों से आगे आकर गांव-गांव नारी सम्मान और सुरक्षा के लिए जागरुकता अभियान चलाने को कहा।
पहले स्वयं को फिर समाज को बदलें
शिक्षिका दीपा कुमारी ने कहा कि नारी सम्मान के लिए पहले स्वयं की सोच को बदलना होगा। जब खुद बदलेंगे तो लोगों की सोच अपने आप ही बदलने लगेगी। स्वयं और अपने परिवार को नारी सम्मान की मिसाल के रूप में पेश कर दूसरों के लिए प्रेरणा बनें।
अपराजिता से मिला हौसला
छात्रा छवि चौधरी ने अमर उजाला के अपराजिता अभियान की सराहना की। कहा कि विद्यालय में हुए इस कार्यक्रम से उन्हें काफी हौसला मिला है। समाज में महिलाओं की स्थिति के बारे में जानकारी मिली है। उन्होंने अमर उजाला को कार्यक्रम कराने के लिए धन्यवाद दिया।
अभियान से मिली आगे बढ़ने की प्रेरणा
छात्रा इरम नाज ने अपराजिता अभियान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उनके विद्यालय में पहली बार इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन हुआ है। इससे उन्हें मेहनत कर अपने बलबूते आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।
नारी सम्मान और सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा
छात्रा मुस्कान मलिक ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समय-समय पर होते रहने चाहिए। नारी सम्मान और सुरक्षा बहुत बड़ा मुद्दा है। अमर उजाला ने इसके लिए अभियान चलाकर नारियों का गौरव बढ़ाया है।
नारी गरिमा का कराया अहसास
उजमा के अनुसार अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम से उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। इसके साथ ही नारी की शक्ति और गरिमा का एहसास हुआ है। साथ ही जीवन में किसी भी क्षेत्र में बिना डर के साहस के आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।
अभियान ने दिया नया मुकाम
प्रिया शर्मा का कहना है कि अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम से महिलाओं को नया मुकाम प्राप्त करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इस कार्यक्रम की जितनी भी सराहना की जाए वह कम है।