तीन मासूमों के सिर से कोरोना ने छीन लिया पिता का साया
बिजनौर। यूं तो कोरोनाकाल में सैकड़ों जान चली गईं, लेकिन कुछ परिवारों पर तो यह आफत बनकर टूटा है। ऐसा ही एक परिवार है धामपुर क्षेत्र के गांव मिल जहांगीराबाद में। यहां तीस वर्षीय दीपक करंट से झुलसा था। अस्पताल में उपचार के दौरान वह कोरोना की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। उसके तीन बच्चों से पिता का सहारा ही नहीं हटा, बल्कि परिवार की आय का साधन भी समाप्त हो गया। अब तीनों बच्चों और उसकी पत्नी के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया, क्योंकि परिवार के अन्य लोग खुद भी मेहनत मजदूरी कर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं।
दीपक के भाई सुरेंद्र कुमार ने बताया कि करीब पांच माह पहले दीपक विद्युत निगम के कुछ अधिकारियों के कहने पर एक खंभे पर बिजली का तार जोड़ने चढ़ा था। इसके लिए उसे 50 रुपये मिलने थे। उसी समय बिजली के करंट से उसके हाथ पैर झुलस गए। उसे परिजनों ने कई अस्पतालों में दिखाया और अंत में मेरठ एक अस्पताल में ले गए। वहां इलाज के दौरान दीपक को कोराना होने की बात कही गई और तीसरे दिन उसने दम तोड़ दिया। दीपक के तीन बच्चे हैं। इनमें अशिंका छह साल, हिमानी तीन साल और सबसे छोटा बेटा दीपांशु एक साल का है। वह किसी तरह अपने परिवार की देखरेख कर रहा था, लेकिन अब उसके जाने के बाद पत्नी पूजा के कंधों पर तीन बच्चों का भार आ गया है।
पहले इलाज और बाद में केस में लग गई जमापूंजी
दीपक के भाई सुरेंद्र कुमार ने बताया कि जो परिवार की जमा पूंजी थी, वह इलाज पर खर्च हो गई। इसके बाद बिजली विभाग की लापरवाही के कारण भाई के झुलसने को लेकर क्लेम लेने के लिए काफी खर्चा हो गया, लेकिन न तो क्लेम मिला और न ही कहीं से मदद मिली है। दीपक की बड़ी बेटी अंशिका तीसरी क्लास में पढ़ती है, जबकि उससे छोटी बेटी हिमानी इस बार पहली क्लास में आई है। पिता के जाने के बाद तीनों बच्चों की देखभाल और पढ़ाई को लेकर परिवार के साथ-साथ उनकी मां भी परेशान हैं। फिलहाल वह अपने बच्चों के साथ मायके चली गई है, लेकिन आगे की पढ़ाई कैसे होगी, इसकी चिंता लगातार सता रही है।