कोतवाली देहात के शहबाजपुर में मृतकों के घर के बाहर जमा भीड़।
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बिजनौर में पुणे के एक बेकरी में आग लगने से बेकरी में काम करने वाले कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव शहवाजपुर के तीन युवाओं की मौत हो गई। मरने वालों में दो सगे भाई हैं। हालांकि छह युवकों की बेकरी में आग लेने से मौत हुई है, उनमें तीन शहवाजपुर के रहने वाले थे। युवकों की मौत से गांव में कोहराम मच गया।
कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव शहवाजपुर निवासी नसीम अहमद का 20 साल का पुत्र फईमुद्दीन, 18 वर्षीय शानू और गांव के ही फिरोज 20 वर्ष पुत्र रईस अहमद व धामपुर क्षेत्र के गांव मिलक जहांगीराबाद का एक युवक व लखनऊ के दो युवक नगीना क्षेत्र के गांव पुरैनी निवासी तैय्यब की साझे में महाराष्ट्र के पुणे क्षेत्र के कोडवा में चल रही बैक्स एंड केक्स बेकरी में काम करते थे। बृहस्पतिवार रात सभी युवक एक साथ कमरे में सो रहे थे। आरोप है कि इस दौरान बेकरी मालिक बेकरी में बाहर से ताला लगाकर चला गया। रात किसी समय बेकरी में शाट सर्किट होने से आग लग गई। आग लगने से फईमुद्दीन, सोनू व फिरोज समेत छह युवकों की मौत हो गई। घटना की सूचना पड़ोसियों ने दमकल अधिकारी और बेकरी मालिक को दी। शुक्रवार सुबह बेकरी संचालक तैय्यब ने आकर बेकरी का ताला खोलकर देख तो बेकरी में काम करने वाले छह युवक मृत पड़े थे। युवकों के परिजनों को घटना की सूचना दी गई। मृतक के परिजन पोस्टमार्टम के बाद शनिवार रात तक शव गांव में आने की बात कहे रहे हैं। पुरैनी के ग्राम प्रधान पति अनूप चौहान के मुताबिक गांव में बेकरी का मालिक तैय्यब के परिवार को कोई सदस्य नहीं रहता है। सभी तैय्यब के साथ पुणे में रहते हैं। गांव में बेकरी के हादसे की सूचना आई है।
रात को बेकरी में ही सोते थे तीनों युवक
कोतवालीदेहात में पुणे में बेकरी में आग लगने से जलकर मरे तीनों युवक रोजगार की तलाश में गए थे। वहां कमरे का किराया बचाने के लिए तीनों रात को बेकरी में ही सोते थे। तीनों की मौत से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।
जिले के लोगों ने गुजरात और पुणे में बड़ी तादाद में बेकरी खोल रखी है। ये अपने परिचितों को वहां काम करने ले जाते हैं। यहां के काफी युवक गुजरात और महाराष्ट्र में बेकरी में काम करते हैं। इनको वहां पर अच्छा मेहनताना पड़ जाता है। गांव शहबाजपुर के फिरोज, फईमुद्दीन और शानू भी रोजी रोटी की खातिर कई साल से पुणे में ही बेकरी पर काम कर रहे थे। वह केवल त्यौहार या कोई खास मौका होने पर गांव में आते थे। इस हादसे से पहले तीनों बकरा ईद पर अपने घर आए थे। गांव वालों के मुताबिक पुणे में अच्छा मेहनताना मिलने के बाद भी कमरे पर रहना आसान नहीं है। वहां पर महंगे किराए पर कमरे मिलते हैं। इसलिए फिरोज, फईमुद्दीन और शानू रात को बेकरी में ही सोते थे। दिन में वे बेकरी में काम करते थे और रात को वहीं रूक जाते थे। तीनों रुपये जोड़ने के लिए ऐसा करते थे। उनके मुताबिक दूसरे राज्यों में बेकरी पर काम करने वाले जिले के ज्यादातर युवक या व्यक्ति रात को बेकरी में सोते हैं। गांव वालों के मुताबिक मरने वाले ही अपने घरों में इकलौते कमाने वाले थे। तीनों की मौत के बाद अब उनके परिवार वालों के सामने रोजी रोटी का भी संकट आ सकता है। गांव में सभी तीनों के शव आने का इंतजार कर रहे हैं।