बिजनौर में एनएचएम में हुए तीन करोड़ दस लाख के घोटाले में हस्ताक्षर करने वाले तत्कालीन एसीएमओ (एनएचएम) डा.पीआर नायर के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं। सीएमओ डा.सुखवीर ने तत्कालीन एसीएमओ के हस्ताक्षर को गाजियाबाद की एक लैब में जांच के लिए भेजा था।
एनएचएम में वर्ष 2016 के जून व जुलाई में तीन करोड़ दस लाख रुपये का घोटाला हुआ था। घोटाले में बिना किसी सामान खरीद के चार कंपनियों को यह पेमेंट दिया गया था। पेमेंट के अप्रुवल पर तत्कालीन सीएमओ डा.एमएम अग्रवाल व एसीएमओ डा.पीआर नायर के हस्ताक्षर पाए गए थे। दोनों अधिकारियों ने अपने हस्ताक्षर फर्जी होने की बात कही थी।
यहां तक की डा.पीआर नायर ने बताया है कि वह पेमेंट की ट्रांजक्शन के समय छुट्टियों पर गए हुए थे। इस मामले में एक लिपिक व एक अकाउंटेंट को भी जेल जा चुके हैं। मामले में डीएम जगतराज ने भी चारों कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने के लिए शासन को पत्र लिखा है। सीएमओ डा.सुखवीर सिंह ने मार्च में तत्कालीन एसीएमओ एनएचएम के हस्ताक्षरों को जांच के लिए गाजियाबाद स्थित एक लैब को भेजा था।
हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार अप्रुवल पर मिले हस्ताक्षर और ओरिजन हस्ताक्षर भिन्न हैं, या कह सकते हैं कि अप्रुवल पर किए गए हस्ताक्षर फर्जी है। लैब ने आठ अलग-अलग तरीके से हस्ताक्षर की जांच की है।
इस बाबत सीएमओ डा.सुखवीर सिंह ने बताया कि तत्कालीन एसीएमओ एनएचएम डा.पीआर नायर के हस्ताक्षर जांच के लिए लैब भेजे गए थे, जो अप्रुवल पर किए गए हस्ताक्षर से भिन्न पाए गए हैं। जो संभवत फर्जी हो सकते हैं।