बिजनौर के शिवाला कलां में बड़े पशुओं की कुर्बानी करने पर रोक लगाए जाने से गुस्साए ग्रामीणों ने ईद नहीं मनाई। तनाव को लेकर एसपी सिटी भारी पुलिस बल के साथ थाने में डेरा डाले रहे। सुरक्षा के लिहाज से चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही।
गांव शिवाला कलां में पिछले कई दिनों से ईद पर बड़े पशुओं की कुर्बानी को लेकर विवाद चल रहा था। हिंदू पक्ष के लोगों का कहना था कि उनके गांव में कभी भी बड़े पशुओं की कुर्बानी नहीं हुई है। इस बार मुस्लिम समुदाय के लोग नई परंपरा शुरू करना चाहते हैं। हिंदुओं ने प्रशासन से खुले में सार्वजनिक स्थान पर कुर्बानी और बड़े पशुओं कुर्बानी करने पर रोक लगाने की मांग की थी। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वह पिछले कई वर्षों से गांव में बड़े पशुओं की कुर्बानी करते आ रहे हैं। इस बात को लेकर थाने में दोनों पक्षों की प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन दोनों पक्ष अपनी बात पर अड़े रहे।
मंगलवार को मुस्लिम समाज के लोग सपा नेताओं के साथ बिजनौर जाकर डीएम से मिले थे और गांव में बड़े पशुओं की कुर्बानी की अनुमति मांगी थी। डीएम ने ग्रामीणों को इस मामले की जांच कराने का भरोसा दिलाते हुए गांव में कोई नई परंपरा शुरू न होने देने की बात कही थी। इसके बाद ग्रामीणों ने ईद का त्योहार न मनाने की घोषणा कर दी। बुधवार को मुस्लिमों ने ईद नहीं मनाई। ईदगाह पर नमाज नहीं पढ़ी और न ही कुर्बानी की रस्म अदा की। इसके साथ ही पास के गांव जुझैला, शिवाला खुर्द और आराजी भैंसा के मुस्लिम भी शिवाला कलां में ईदगाह पर आकर नमाज अदा करते थे। विवाद के चलते इन गांवों से भी ग्रामीण ईदगाह पर नमाज पढ़ने नहीं आए। गांव में तनाव को देखते हुए एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह, एडीएम विनोद कुमार गौड़, एसडीएम चांदपुर, उमेश मिश्रा, सीओ राजकुमार सिंह भारी पुलिस फोर्स एवं रेपिड एक्शन फोर्स के साथ गांव में डेरा डाले रहे।
पशु अवशेष गागन नदी में फेंके, पाडली मांडू में तनाव
धामपुर। गांव पाडली मांडू में पशु कुर्बानी के बाद अवशेषों को गागन नदी में फेंके जाने से दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। घटना सूचना ग्रामीणों ने एसडीएम और सीओ को दी। आरोप है कि पशुओं के अवशेषों को गांव में इर्द गिर्द ही फेंका जा रहा है। गांव के चौधरी रूपेंद्र डबास, सचिन कुमार, राहुल कुमार, नरेंद्र तोमर, रोहिताश सैनी, चंद्रप्रकाश, सुलभ डबास, राजकुमार शर्मा, गुरदीप सिंह, ओमकार सिंह का कहना है कि उन्होंने मंगलवार को एसडीएम आलोक कुमार यादव को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें अवगत कराया गया था कि उनके गांव के दूसरे समुदाय के लोग पशु कुर्बानी के बाद अवशेषों को नदी-नालों में फेंकते हैं, इससे गांव का माहौल खराब होता है। ग्रामीणों का आरोप है कि बुधवार को कुर्बानी के बाद कुछ लोगों ने पशुओं के अवशेषों को गागन नदी में फेंकना शुरू किया तो इसकी सूचना एसडीएम, सीओ को दी, लेकिन कोई अधिकारी गांव में नहीं पहुंचा। काफी देर तक जब पुलिस गांव में नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने खुद ही आरोपियों का विरोध किया। इसके बाद गांव के दूसरे रास्तों से निकल कर और अन्य स्थानों पर अवशेषों को फेंकना शुरू कर दिया। जिससे गांव में तनाव की स्थिति बनी है। वहीं, आरोपियों का कहना है उनके ऊपर लगाए जा रहे सभी आरोप गलत हैं। सीओ महावीर सिंह का कहना है कि गांव में पुलिस को भेजा गया है। हिदायत दी है कि पशु कुर्बानी के बाद अवशेषों को गड्डा खोदकर ही दफन किया जाएगा। यदि किसी ने मनमाने तौर पर नदी, नालों या जंगलों में फेंकने का प्रयास किया तो कार्रवाई होगी।
राहतपुर मदरसे में कुर्बानी की नई परंपरा रोकी
मंडावली। नजीबाबाद-हरिद्वार नेशनल हाईवे स्थित राहतपुर खुर्द में करीब दो वर्ष पूर्व जामिया उलूम कुरान हुसैनिया मदरसे का निर्माण हुआ था। मदरसे में दीनी शिक्षा ग्रहण करने के लिए कुछ बच्चे अध्ययनरत हैं। ईद उल अजहा की पूर्व संध्या पर मदरसे में कुर्बानी के लिए पशुुओं को लाया गया। मंझाड़ी सहित क्षेत्रीय ग्रामीणों नरपाल सिंह, बलराम सिंह, सत्यपाल सिंह, रणवीर सिंह ने पुलिस को सूचना देकर बताया कि मदरसे में कुर्बानी की नई परंपरा शुरू की जा रही है। उन्होंने नई परंपरा को रोकने की पुलिस से मांग की। मंगलवार की देर रात मंडावली थानाध्यक्ष राजीव त्यागी, एसआई सुशील तोमर, एसआई रणवीर सिंह के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। थानाध्यक्ष ने मदरसे संचालक मुफ्ती सज्जाद व ग्राम प्रधान माजिद को कुर्बानी की नई परंपरा की शुरूआत न करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने मदरसे में कुर्बानी के लिए लाए गए 23 पशुओं को ग्राम प्रधान के सुपुर्द करते हुए राहतपुर में पुराने स्थल पर कुर्बानी देने के निर्देश दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष ने मदरसे पर पुलिस तैनात की है।