रुद्रपुर में काशीपुर में 25 जून 2016 की रात सात वर्षीय बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के बहुचर्चित मामले में रुद्रपुर की पॉक्सो कोर्ट ने अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई है। ऊधमसिंह नगर जिले में फांसी की सजा सुनाए जाने का यह पहला मामला है। सजा सुनाते समय आरोपी पुलिस कस्टडी में था। विद्वान जज नीलम रात्रा ने 70 पेज के जजमेंट में अपनी टिप्पणी में कहा कि यह अति गंभीर मामला और जघन्य अपराध है।
सरकारी वकील उमेशनाथ पांडेय और दीपक अरोरा के मुताबिक काशीपुर के टांडा उज्जैन क्षेत्र के ढकिया गुलाबो में 25 जून 2016 की रात भगवती जागरण का आयोजन था। जागरण के दौरान सात वर्षीय बच्ची का अपहरण हो गया था। बच्ची के लापता होने का पता चलने पर उसकी खोज की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। अगले दिन बच्ची की खून से लथपथ लाश नजदीक के खेत से बरामद हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बलात्कार के बाद हत्या करने की पुष्टि होने पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रेप, हत्या, अपहरण और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
पुलिस ने जांच के बाद घटना वाले दिन देवी जागरण में लाइटिंग करने वाले यूपी के जिला बिजनौर के अफजलगढ़ क्षेत्र बिलड़ा फार्म निवासी करनदीप शर्मा उर्फ रजिया उर्फ राजू पुत्र अशोक शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
ट्रायल अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) नीलम रात्रा की फास्टट्रैक कोर्ट में चला। सरकारी वकील उमेश नाथ पांडे और दीपक अरोरा ने 15 गवाह पेश किए। डीएनए और मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत की। शव पर मिले स्पर्म और करनदीप का डीएनए एक ही होने की पुष्टि हुई।
न्यायाधीश ने सरकारी वकीलों द्वारा पेश साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए करनदीप को हत्यारा व दुष्कर्मी करार दिया। कोर्ट ने उसे धारा 302 और 376 के तहत फांसी की सजा सुनाई, धारा 363 के तहत दस साल की कैद और दस हजार जुर्माना और धारा 201 में तीन साल की कैद व दस हजार जुर्माने की सजा सुनाई। मात्र एक पन्ने की चार्जशीट ने साफ कर दिया कि वह इस जघन्य अपराध डीएनए टेस्ट में भी पूरी तरह दोषी सिद्ध हुआ है।