नूरपुर। प्रदेश में बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह अब पुलिस अफसरों के परिजनों को भी नहीं बख्श रहे। शुक्रवार रात बदमाशों ने मेरठ रेंज के डीआईजी पीएसी नवनीत राणा के पिता के निवास से उनकी लाइसेंसी रिवाल्वर और रायफल समेत 50 हजार की नकदी चोरी कर ली।
डीआईजी के पिता के घर चोरी से जिले का पूरा पुलिस महकमा हिल गया। अफसरों ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की। फिंगर प्रिंट कराए गए। खोजी कुत्ते बुलाए गए लेकिन फिलहाल कोई क्लू हाथ नहीं लगा। डीआईजी पीएसी ने पहुंचकर जल्द खुलासे के लिए अफसरों से कहा।
नूरपुर थाने के गांव गोहावर जैत निवासी नवनीत कुमार राणा डीआईजी पीएसी मेरठ रेंज हैं। उनके भतीजे डा. अनंत कुमार राणा का गोहावर चौराहे पर हरी अस्पताल है। डा अनंत परिवार सहित मुरादाबाद में रहते हैं और सप्ताह में केवल एक दिन ही अस्पताल में मरीज देखने आते हैं।
डीआईजी के पिता नरेंद्र पाल राणा अस्पताल परिसर में बने निवास में अकेले रहते हैं। शुक्रवार की रात बदमाश अस्पताल की दीवार फांदकर अस्पताल परिसर में घुसे और नरेंद्र पाल राणा के निवास की एक खिड़की की ग्रिल तोड़कर कमरे में घुसे और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।
कमरे की दराज से सेफ की चाबी निकाली उसमें रखी 315 बोर की लाइसेंसी रायफल और 32 बोर का लाइसेंसी रिवाल्वर और 50 हजार की नकदी चोरी कर खिड़की के रास्ते ही फरार हो गए।
सुबह जब अस्पताल स्टाफ ने आकर कमरा खोलने का प्रयास किया तो वह अंदर से बंद मिला जिसके बाद खिड़की का ग्रिल टूटी देख उन्हें चोरी होने का पता लगा। स्टाफ ने पुलिस को घटना की सूचना दी। डीआईजी के परिवार में चोरी से पूरे पुलिस महकमें में खलबली मच गई।
एसपी सुभाष बघेल समेत कई पुलिस अधिकारी ,फोरेंसिक एक्सपर्ट, डॉग स्क वायड ओर क्राइम ब्रांच की टीम मौके पर पहुंची। जांच पड़ताल के बाद फिंगर्र प्रिंट आदि लिए गए। डीआईजी नवनीत कुमार राणा ने भी मौके पर पहुंचकर एसपी से बात कर घटना का खुलासा करने को कहा।
डीआईजी के बड़े भाई हरिराज सिंह की ओर से पुलिस को घटना की तहरीर दी गई है। थानाध्यक्ष प्रदीप यादव का कहना है कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
किसी जानकार का हाथ होने की आशंका
नूरपुर। पुलिस को इस चोरी की घटना में किसी जानकार का हाथ होने की आशंका है। बकौल पुलिस चोरों को पता था कि सेफ में ही लाइसेंसी हथियार हैं।
सेफ की चाबी कहां है यह भी जानकारी उन्हें थी इसलिए ही उन्होंने आसानी से चाबी निकालकर सेफ खोली।
उन्हें यह भी पता था कि डॉक्टर नरेंद्र राणा किस स्थान पर सोते हैं, यही वजह रही कि डॉक्टर नरेंद्र को भी बदमाशों के घुसने की आहट तक नहीं सुनी।