एडीजे रामकरन प्रथम ने विरेश हत्याकांड में मृतक के दो सगे भाइयों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
थाना नूरपुर के गांव गोहावर निवासी मुनेश देवी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अपने पहले पति जयपाल सिंह की मौत के बाद उसने गोहावर निवासी विरेश से दूसरा विवाह किया था। उसके पास अपने पहले पति जयपाल सिंह के हिस्से की 30 बीघा जमीन थी, जो उसने शादी के बाद विरेश के नाम कर दी गई थी।
विरेश की पहली पत्नी की भी मृत्यु हो गई थी। मुनेश के पहले पति से एक लड़की संजू थी, जिसका विवाह जैतरा निवासी गजेंद्र सिंह के साथ कर दिया था। विरेश ने 30 बीघा जमीन में से 12 बीघा जमीन संजू के नाम कर दी थी।
इस बात से विरेश के भाई नरेश, मुनेश नाराज थे और वे अपने भाई विरेश को उसकी हत्या से 15-20 दिन पहले जबरदस्ती अपने घर ले आए। 31 मई 2014 को मुनेश देवी जब अपने घर आई तो उसे पता चला कि उसके पति विरेश कुमार की हत्या उसके भाई नरेश, मुनेश ने रस्सी से गला घोंटकर कर दी है।
शासकीय अधिवक्ता इसरार अली के अनुसार इस हत्याकांड में उपलब्ध साक्ष्यों व गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने मृतक के भाइयों नरेश व मुनेश को हत्या को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।