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गैंगरेप के आरोपी बस परिचालक की जमानत याचिका निरस्त

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बस परिचालक की जमानत याचिका निरस्त
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बिजनौर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अल्ला रक्खे खां ने गैंगेरप के आरोपी बस परिचालक संजीव की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
जिला मुजफ्फरनगर के थाना रतनपुरी निवासी एक गांव की युवती ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह 26 दिसंबर 2018 से कोटद्वार में कोचिंग कर रही है। 29 दिसंबर को जब वह एक बस से दिल्ली अपने मामा के लड़के पास गई तो बस के कंडक्टर संजीव से उसकी बातचीत हुई। संजीव ने उसे अपना नंबर दे दिया। एक बार उस युवती ने बस का टाइम मालूम करने के लिए संजीव को फोन को दिया तो संजीव के पास उसका नंबर पहुंच गया। इसके बाद से संजीव अकसर युवती से फोन से बातें करने लगा। छह जनवरी 2019 को युवती अपना फोन सही कराने नजीबाबाद आई थी। उसने युवती को जॉब दिलाने की बात कहकर बिजनौर बुलाया। वह दोपहर लगभग 12 सेंट मेरी चौक पर आई। वहां पर संजीव अपने एक दोस्त के साथ कार लेकर मिला और उसे गाड़ी में बैठाकर कृष्णा कॉलेज ले आए। वहां से संजीव ने अपने एक अन्य साथी को भी गाड़ी में बैठाया और जंगल में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। दुष्कर्म के बाद संजीव और उसके साथी युवती को सड़क किनारे छोड़कर भाग गए। अदालत ने थाना कोतवाली शहर क्षेत्र के गांव जीतपुरा निवासी मुख्य अभियुक्त संजीव की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
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एक अन्य मामले में दहेज हत्या में आरोपी पति मोहित की जमानत याचिका भी निरस्त की है। थाना कोतवाली शहर क्षेत्र के गांव झीरन निवासी मोहित कुमार की शादी 31 मई 2017 को मीतल के साथ हुई थी। मोहित और उसके परिजन शादी में मिले दान दहेज से खुश नहीं थे। 26 अगस्त 2018 को मीतल की उसके पति मोहित और उसके अन्य परिजनों ने हत्या कर दी थी।
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