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वायरल बुखार की तरह घर-घर पहुंचा कोरोना संक्रमण

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वायरल बुखार की तरह घर-घर पहुंचा कोरोना संक्रमण
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बिजनौर। वायरल बुखार की तरह इस बार कोरोना के मरीज घर-घर नजर आने लगे हैं। इसमें राहत वाली बात ये है कि अधिकांश एसिंप्ट्रोमेटिक होने के कारण ठीक भी हो रहे हैं। खास बात ये है कि वायरल लोड अधिक होने के कारण एंटीजन टेस्ट में ही कोरोना पॉजिटिव का पता चल जा रहा है। वर्तमान में केवल जिला अस्पताल में ही करीब 55 प्रतिशत वायरल के रोगी आ रहे हैं।
जिले में तीन प्रकार से कोरोना की जांच कराई जा रही है। एंटीजन टेस्ट, ट्रू नॉट तथा आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर ही कोरोना संक्रमित मरीजों की पुष्टि की जा रही है। जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ. संजय कुमार शंकर के अनुसार शरीर में जब भी कोई भी बाहरी वायरस, बैक्टीरिया या कोई इंफेक्शन होता है तो उस बाहरी चीज को ही एंटीजन कहते हैं। उन्होंने बताया कि एंटीजन के शरीर में प्रवेश करने के बाद शरीर जो रोग प्रतिरोधक क्षमता डेवलप करता है, उसे एंटीबॉडी कहते हैं। रैपिड एंटीजन टेस्ट में नाक और गले से स्वॉब यानी एक पतली-सी नली से थोड़ा-सा सैंपल लेते हैं। लार या नाक के भीतर पाए जाने वाले तरल को टेस्ट किट पर डालते हैं। टेस्ट किट थोड़ी देर में बता देती है कि संबंधित व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव है अथवा नहीं।
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55 फीसदी बुखार के मरीज पहुंच रहे जिला अस्पताल
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद का कहना है कि सिंप्ट्रोमेटिक एवं एसिंप्ट्रोमेटिक दोनों तरह के मरीज एंटीजन टेस्ट में पॉजिटिव निकल रहे हैं। आरटीपीसीआर टेस्ट को कोरोना की पक्की जांच माना जाता है। इस एक टेस्ट में दो से चार घंटे लगते हैं, वहीं एंटीजन टेस्ट में लगभग 30 मिनट लगते हैं। अगर एंटीजन टेस्ट में टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव आया तो उसे पक्का रिजल्ट मानकर व्यक्ति का कोरोना का ट्रीटमेंट शुरू कर देते हैं। लक्षण न होने पर निगेटिव आए व्यक्ति को निगेटिव ही मानते हैं, हालांकि सिंप्ट्रोमेटिक होने पर पुष्टि के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट किया जाता है। वर्तमान में करीब 55 फीसदी मरीज खांसी, नजला, बुखार आदि रोगों से पीड़ित मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
एंटीजन टेस्ट की क्षमता 100 प्रतिशत सही
सीएमओ डॉ. विजय कुमार यादव बताते हैं कि दिल्ली लैब और एम्स में इस एंटीजन टेस्ट किट की जांच की गई है। कोई व्यक्ति निगेटिव है, ये बताने में इस एंटीजन टेस्ट किट की क्षमता लगभग 100 प्रतिशत तक सही मिली। दूसरी ओर किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस है या नहीं, इसकी एंटीजन टेस्ट में पुष्टि व्यक्ति में मौजूद कोरोना वायरस के लोड होने पर निर्भर करता है। अगर किसी व्यक्ति में वायरल लोड अधिक है, तो 85 प्रतिशत तक रिजल्ट सही होता है और वायरल लोड कम होने पर 50 प्रतिशत तक परिणाम सही निकलता है। एंटीजन टेस्ट से काफी जल्दी रिजल्ट आ रहे हैं और कांट्रेक्ट ट्रेसिंग जल्दी करने में भी मदद मिल रही है। वायरल लोड पर एंटीजन टेस्ट का रिजल्ट काफी निर्भर करता है। किसी सिंप्ट्रोमेटिक व्यक्ति का रिजल्ट निगेटिव आने पर उसका आरटीपीसीआर कराया जा सकता है।
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बरसात के मौसम में बढ़ जाते हैं वायरल के मरीज
जिला अस्पताल के जनरल फिजीशियन डॉ. राधेश्याम वर्मा ने बताया कि आमतौर पर बरसात के मौसम में वायरल बुखार का प्रकोप फैलता है। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह से अधिक समय तक बुखार रहने पर यह वायरल में परिवर्तित हो जाता है। आजकल लोग सामान्य बुखार होने पर भी कोरोना के डर के कारण अपनी जांच कराने से बचते हैं, लेकिन ऐसा करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने सलाह दी है कि बुखार होने पर तुरंत ही अपने नजदीकि सरकारी अस्पताल में जांच कराकर उपचार शुरू करा दें। बिल्कुल भी न तो डरें और न ही दूसरों को डराएं। हर हालत में कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन अवश्य करें।
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