गोहावर कस्बा दो ग्राम पंचायत गोहावर हल्लू और गोहावर जैत को मिलाकर बना है। यहां की आबादी करीब 13 हजार है। ग्रामवासियों के अनुसार अप्रैल से गांव में बीमारी ने पैर पसारे और करीब डेढ़ माह में 35 से अधिक लोग काल का ग्रास बन गए। दोनों ग्राम पंचायतों में मरने वालों में अधिकांश को बुखार के बाद सांस लेने में परेशानी हुई थी। इतनी संख्या में ग्रामवासियों के मरने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई कारगर उपाय नहीं हुए हैं।
हालांकि कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग ने प्रभारी चिकित्साधिकारी अजय धर्मेश गंधर्व के नेतृत्व में गांव में कैंप लगाकर कोरोना के साथ अन्य बीमारियों की जांच की थी। इसके अलावा आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर सर्वे कर थर्मल स्क्रीनिंग कर बीमार व्यक्तियों को अस्पताल जाने की सलाह दे रही हैं, लेकिन ग्रामीण इससे संतुष्ट नहीं हैं। ग्रामवासियों ने गांव में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्थायी कैंप लगाकर बीमारों का इलाज कराने व गांव की सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है।
ग्राम पंचायत गोहावर जैत में आबिद हुसैन(54), शकुंतला देवी(86), पूरन सिंह(48), राखी देवी (37), दिनेश(54), निरुपमा चौहान (57), पूनम देवी(54), शाहिद हुसैन (54), शंकरलाल (65), रजत कुमार (26), जयमाला (65), पवन कुमार(55), रामवती(72), दीपक(17), असगरी(85), फैसल(20), असगरी(60) व संजोता देवी (55) के अलावा ग्राम पंचायत गोहावर हल्लू में महेंद्र (58), अमर सिंह (35), सुरेश देवी(50), समन्ता(55), कृपाल(65), अनीता गुप्ता(58), ऊषा देवी(65), खुर्शीद अहमद(38), योगेश(55) और रामवती(65) बीमारी के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं।
अभी कई हैं बीमार
गोहारवर में मौत की रफ्तार भले ही धीमी हो, लेकिन बीमारों की संख्या अभी बहुत है। रवि, आकिब, हुमैरा, नईमा, प्रवेंद्र, चंचल, अनीता, कौशल, अर्चना, भुवनेश्वरी, लव कुमार, संतोष, आकांक्षा सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी बुखार व खांसी से पीड़ित है।