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‘ट्रस्ट के बजाए मंदिर निर्माण में करें सहयोग’

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‘ट्रस्ट के बजाए मंदिर निर्माण में करें सहयोग’
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बिजनौर। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की घोषणा होने के बाद ट्रस्ट में जगह नहीं मिलने को लेकर संतों में छिड़े विवाद से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोग बेहद आहत हैं। उनका कहना है कि राम मंदिर के लिए ट्रस्ट में शामिल होने के लिए नहीं बल्कि भव्य राम मंदिर बनाने के लिए आंदोलन किया गया था। तमाम लोगों ने इसमें बलिदान दिया। अगर सभी ट्रस्ट में शामिल होने की बात करेंगे तो इतने लोगों को ट्रस्ट में कैसे शामिल किया जा सकता है। सब मिल जुलकर राम मंदिर बनाने में सहयोग करें।
बजरंग दल के सदस्य व विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख कार्यकर्ता अनिल पांडेय के मुताबिक राम मंदिर को लेकर अब तक जितने भी आंदोलन हुए उनमें वह जेल गए हैं। 1989 में राम जन्मभूमि शिलान्यास में भी उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई थी। शिला पूजन के समय अपनी टुकड़ी को लेकर वह अयोध्या गए थे। उन्होंने कहा कि आंदोलन में लाखों कार सेवक व संतों ने भाग लिया था। ये सभी राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य नहीं बन सकते। आंदोलन से जुड़े संतों व कार सेवकों का ट्रस्ट में शामिल होने का मकसद भी नहीं था। सभी को राम मंदिर निर्माण में सहयोग करना चाहिए। ट्रस्ट को लेकर कोई विवाद में न पड़े।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक महेश राजपूत के मुताबिक राम मंदिर आंदोलन में उन्होंने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और जेल भी गए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए जो ट्रस्ट बना है वह बहुत अच्छा है। निष्पक्ष हस्तियों को उसमें रखा गया है। ट्रस्ट को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। सब मिल जुलकर मंदिर बनाने में सहयोग करें। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचार प्रमुख मयंक मयूर का कहना है कि राम मंदिर आंदोलन में हजारों लोगों ने बलिदान दिया था। तमाम लोग मरे तो बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे। ऐसे तो उन लोगों के परिवार के सदस्य भी ट्रस्ट में शामिल होने की बात उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में शामिल होने को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। सभी का लक्ष्य मंदिर बनाने का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में अगर सभी को शामिल कर लिया गया तो ट्रस्ट में जगह नहीं बचेगी।
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