हल्दौर में गांव सुल्तानपुर के जंगल में किसानों ने चकबंदी करने पहुंची टीम का घेराव कर जमकर हंगामा किया। आक्रोशित महिलाएं टीम से भिड़ गईं। मामला बिगड़ता देख टीम चकबंदी किए बैरंग लौटना पड़ा। किसानों ने डीएम से मिलकर समस्या का समाधान होने पर ही चकबंदी कराने का निर्णय लिया है।
शनिवार सुबह करीब 11 बजे डीएम के निर्देश पर चकबंदी सीओ मंजू लता, एसीओ जगवीर सिंह, संजय मौर्या, भारत सिंह, कानून गोवर्धन हल्का लेखपाल मदनपाल सिंह थाने पहुंचे। चकबंदी विभाग की टीम थाना पुलिस को साथ लेकर गांव सुल्तानपुर के जंगल में चकबंदी प्रक्रिया करने पहुंची। मामले की सूचना पाकर जंगल में किसान एकजुट होकर पहुंचे और चकबंदी का विरोध करने लगे। चकबंदी विभाग की टीम ने खेतों की पैमाइश करने का प्रयास किया। किसानों ने टीम का घेराव कर जमकर हंगामा किया। विरोध करने जंगल पहुंची महिलाएं टीम के साथ भिड़ गईं और टीम को जमकर खरीखोटी सुनाई। उनके हाथों से जरीव भी खींच ली। किसानों के साथ मौजूूद आजाद किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष मूला सिंह फौजी ने कहा कि वे क्षेत्र में चकबंदी कराकर किसानों का शोषण नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि पूर्व में हुई चकबंदी में धांधली हुई है, पहले उसकी जांच की जाए और रिश्वतखोरी के खेल में लिप्त अधिकारियों व दलालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मौके पर पहुंचे चकबंदी जिलाधिकारी मेघ वर्ण व किसानों के बीच वार्ता हुई।
किसानों ने सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों को डीएम के सम्मुख रखकर समस्या का समाधान होने पर चकबंदी प्रक्रिया शुरू कराने की बात कही है। इस पर चकबंदी विभाग की टीम बिना चकबंदी किए लौट गई। विरोध जताते किसानों को थाना प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र भड़ाना ने शांत करने का प्रयास किया। किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे। चकबंदी के विरोध में आकियू के युवराज सिंह, ठाकुर नरेंद्र सिंह, डॉक्टर अशोक कुमार, राजकुमार व गांव के फूल सिंह, सर्वेंद्र सिंह, जयवेंद्र सिंह, मुन्नी देवी, पूनम देवी, राजवती देवी, आदि शामिल रहे।
सहूलियत नहीं, मुसीबत बनी चकबंदी
बिजनौर में किसानों के खेतों को एक जगह लाने और उन्हें चकरोड देने के लिए शुरू की गई चकबंदी प्रक्रिया उनके सिर का दर्द बनती जा रही है। चकबंदी विभाग मनमाने ढंग से किसानों के हवाई चक काट देता है। इसके बाद किसान अपनी जमीन के लिए दर-दर भटकते रहते हैं।
चकबंदी किसान की सहूलियत के लिए की जाती है। जिससे किसान के खेत एक ही चक पर आ जाने से उसे फसलों की सिंचाई और आने जाने में कोई दिक्कत नहीं आती है। लेकिन विभागीय अधिकारी अपनी मनमर्जी से किसान के चक काटते हैं, जबकि हवाई चक की जमीन कहीं पर नहीं होती है। नजीबाबाद ब्लाक के गांव सुंदरपुरा देहरा निवासी दयाराम सिंह की 12 बीघा जमीन का अधिकारियों ने हवाई चक काट दिया गया। किसान की जमीन खसरा खतौनी में तो दर्ज है, लेकिन मौके पर कहीं नहीं है। किसान सालों से अपनी जमीन का पता लगाने के लिए विभाग के चक्कर काट रहा है। भागूवाला में आठ साल और कान्हा नंगला में तीन साल से चकबंदी चल रही है, लेकिन आज तक पूरी नहीं हुई। किसान खेत बदले जाने के डर से फसल तक नहीं बो पाते हैं। किसी गांव को चकबंदी में शामिल करना चकबंदी विभाग के अफसरों के हाथ मलाई की हंडिया लगने के समान होता है। जो किसान जितना मजबूत होता है और जितना ज्यादा चढ़ावा चढ़ाता है, उसे उसकी मर्जी के अनुसार ही चक काटकर दे दिया जाता है। भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।