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Bijnor News: मेडिकल कॉलेज में पहली बार कूल्हे की एसीटैबुलम की जटिल सर्जरी

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बिजनौर मेडिकल कॉलेज में एसीटैबुलम हड्डी का ऑपरेशन करने वाली चिकित्सकों की टीम। स्रोत चिकित्सक
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बिजनौर। मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग के बाद अब हड्डी विभाग में जटिल ऑपरेशन होने लगे हैं। पहली बार मेडिकल कॉलेज में कूल्हे एसीटैबुलम की जटिल सर्जरी की गई। जटिल सर्जरी होने से गंभीर मरीजों को फायदा मिलेगा।
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ईद के दिन गांव खेड़की निवासी अब्दुल रहीम और मोहम्मद फरमान का अपने ही गांव के बाहर रेलवे फाटक पर एक्सीडेंट हो गया था। हादसे में अब्दुल रहीम की एसीटैबुलम हड्डी टूट गई। उन्होंने अपने गांव के डॉ. अतुल यादव से संपर्क किया। डॉ. अतुल ने मेडिकल कॉलेज में उनका ऑपरेशन किया। इसके अलावा बिजनौर के मोहल्ला नवाब का हत्था निवासी हरेंद्र के सीधे पैर के कूल्हे की एसीटैबुलम हड्डी टूट गई। उनका भी मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन हुआ। अब दोनों मरीजों की तबीयत में सुधार है। डॉ. अतुल यादव ने बताया कि ये एक जटिल ऑपरेशन होता है, इसमें काफी समय और मेहनत लगती है। बिजनौर में पहली बार एसीटैबुलम हड्डी के ऑपरेशन किए गए हैं। आगे भी सभी बड़ी सर्जरी मेडिकल कॉलेज में होती रहेगी। हॉस्पिटल के हड्डी विभाग की कुशल टीम डॉ. अतुल कुमार यादव, डॉ. गौरव, डॉ. शीतांशु, डॉ. नितिन एवं ऐनिस्थेटिक डॉ. एफसी वर्मा एवं ओटी स्टाफ द्वारा एसीटैबुलम की तीन से चार घंटे में सफल सर्जरी की।
क्या है एसीटैबुलम हड्डी
एसीटैबुलम कूल्हे की वो हड्डी है, जिसमें हमारी जांघ की हड्डी की बॉल घूमती है। जब ये हड्डी टूट जाती है तो अक्सर कूल्हा अपनी जगह से हटकर ऊपर या अंदर की तरफ चला जाता है। सर्जरी नहीं होने पर मरीज का पैर भी छोटा हो सकता है। साथ ही कूल्हे में खून का प्रवाह खत्म होने की संभावना अधिक रहती है, जिससे कूल्हे की हड्डी सूख जाती है।
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मेडिकल कॉलेज में धीरे-धीरे सुविधाएं बढ़ाई जा रही है। हड्डी विभाग में जटल सर्जरी हुई है। भविष्य में मरीजों को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यहीं हड्डी के ज्यादातर ऑपरेशन हो सकेंगे। ....डॉ. तुहीन वशिष्ठ, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
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