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कई दिन से मर रही थीं मुर्गियां, खुद भेजे सैंपल

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कई दिन से मर रही थीं मुर्गियां, खुद भेजे सैंपल
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बिजनौर। गांव अमखेड़ा संजरपुर में मदनपाल के पोल्ट्री फार्म में कई दिन से मुर्गियां मर रही थीं। लेकिन उसने विभाग के कर्मचारियों को बताने के बजाए सीधे लैब में मुर्गियों के सैंपल भेज दिए। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद अधिकारियों में हड़कंप मचा है।
मदनपाल ने एक बीघा जमीन में पोल्ट्री फार्म चला रखा है। उसने तमिलनाडु की एक कंपनी से कांट्रेक्ट कर रखा है। कंपनी उसे चूजे व फीड देती है और उनके बड़ा होने पर वह कंपनी को दे देता है। बदले में उसे निर्धारित कमीशन मिलता है। पोल्ट्री फार्म पर वह 28 दिसंबर को चार हजार चूजे मुरादनगर से लाया था। कुछ दिन पहले उसके पोल्ट्री फार्म पर मुर्गियां मरने लगीं। उसने कंपनी के सुपरवाइजर को फोन किया तो बरेली कार्यालय स्थित एक कर्मचारी आकर मरी हुई दस मुर्गियां ले गया। जांच में पांच मुर्गियों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई। मदनपाल का कहना है कि उसके पास तीन बीघा जमीन है। एक बीघा में उसने पोल्ट्री फार्म खोल रखा है। वह करीब आठ साल से पोल्ट्री फार्म चला रहा है। अब तक कोई दिक्कत नहीं आई थी। उसका कहना है कि बर्ड फ्लू मिलने से उसे करीब आठ लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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कौवों में नहीं मिला बर्ड फ्लू
जिले में कौवों की मौत भी बर्ड फ्लू से होने की अफवाह फैलती रहती है, लेकिन अब तक एक भी कौवे की मौत बर्ड फ्लू से नहीं हुई है। कई कौवों के पोस्टमार्टम किए गए व जांच के लिए शव बरेली भी भेजे गए, लेकिन बर्ड फ्लू नहीं मिला। इसके बावजूद कौवों या अन्य पक्षियों के शव मिलने पर उन्हें तुरंत चूना डालकर दबाने और हाथ अच्छी तरह सैनिटाइज करने की हिदायत दी जा रही है।
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कुत्ते उठा ले गए मुर्गियां
सरकार की एडवाइजरी के अनुसार बर्ड फ्लू मिलने पर मुर्गियों को दस बाई दस फीट गहरे गड्ढे में दबाया जाता है। पोल्ट्री फार्म के पास मुर्गियां दबाने में भी लापरवाही बरती गई। मरी हुई कुछ मुर्गियों को कुत्ते खाने के लिए उठाकर ले गए। कुछ कुत्तों का पीछा करके गांव वालों ने मुर्गी छीनकर दबा दी। इन मुर्गियों से भी लोगों में संक्रमण के फैलने की आशंका है।
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