बिजनौर। नगीना की जनता ने प्रमुख राजनैतिक पार्टियों को नकारते हुए आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर पर भरोसा किया और संसद भेजा है। चंद्रशेखर आजाद ने 51.19 फीसदी वोट हासिल कर करीब डेढ़ लाख मतों के अंतर से चुनाव जीत लिया। जिन्होंने भाजपा के उम्मीदवार और नहटौर के मौजूदा विधायक ओमकुमार को पटखनी दी है। वहीं, सपा प्रत्याशी मनोज कुमार तीसरे नंबर पर रहे जबकि बसपा के सुरेंद्र सिंह को महज 13272 ही वोट मिल सके।
मंगलवार की सुबह आठ बजे से वेयर हाऊस में मतगणना शुरू हुई। मतगणना के पहले चक्र से ही आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर ने बढ़त बना ली थी, जो आखिरी चक्र तक बढ़त बनाए रहे और चुनाव जीत लिया। चंद्रशेखर को 513140 वोट मिले हैं जबकि दूसरे नंबर पर रहे भाजपा उम्मीदवार ओमकुमार 360491 वोट ही हासिल कर सकें। चंद्रशेखर 151473 वोटों से सांसद चुने गए।
वहीं, सपा उम्मीदवार पूर्व जज मनोज कुमार को महज 102104 वोट ही मिले सके। बसपा उम्मीदवार सुरेंद्र पाल सिंह को सिर्फ 13212 मतों पर संतोष करना पड़ा। इस तरह से भाजपा उम्मीदवार दूसरे, सपा उम्मीदवार तीसरे और बसपा उम्मीदवार चौथे नंबर पर रहे। मतगणना समाप्त होने पर डीएम अंंकित कुमार अग्रवाल ने नगीना लोकसभा क्षेत्र से जीत दर्ज कराने वाले चंद्रशेखर आजाद को प्रमाण पत्र सौंंपा।
पोस्टल में भी विजयी रहे चंद्रशेखर
चंद्रशेखर आजाद को 1328 पोस्टल वोट मिले हैं जबकि दूसरे नंबर पर रहे भाजपा उम्मीदवार को 740 पोस्टल वोट ही मिल सके। सपा उम्मीदवार मनोज कुमार को 270 पोस्टल वोट मिले हैं, बसपा के उम्मीदवार सुरेंद्र कुमार को 60 और निर्दलीय जोगेंद्र को नौ तथा निर्दलीय संजीव कुमार को छह पोस्टल वोट मिले हैं।
ये मिले मत
पार्टी उम्मीदवार मिले वोट
आसपा चंद्रशेखर 513140
भाजपा ओमकुमार 360491
सपा मनोज कुमार 102374
बसपा सुरेंद्र पाल 13212
निर्दलीय जोगेंद्र 4509
निर्दलीय संजीव कुमार 2195
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5307 वोटर ने सभी को नकारा
नगीना लोकसभा क्षेत्र में 5307 वोटरों ने सभी को नकार दिया। इन्हें एक भी उम्मीदवार पसंद नहीं आया, इसलिए नोटा का इस्तेमाल किया। 5287 मतदाताओं ने नोटा के लिए ईवीएम का बटन दबाया जबकि 20 पोस्टल मत भी नोटा को मिले।
नगीना में महज 1.33 फीसदी पर सिमटी बसपा
नगीना लोकसभा क्षेत्र में बसपा महज 1.33 फीसदी वोटों तक ही सिमट कर रह गई हैं। सपा को भी सिर्फ 10.22 फीसदी वोट ही मिल सके। उधर, सत्ताधारी पार्टी भाजपा को नगीना लोकसभा क्षेत्र में 36.6 फीसदी मतों पर ही संतोष करना पड़ा। आसपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।