बिजनौर। बिजनौर शहर में जिला मुख्यालय की स्थापना को 200 साल हो चुके हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर बाकायदा महोत्सव मनाने की तैयारी चल रही है। तमाम आयोजनों के जरिए जिले की बाशिंदों की नई पीढ़ी को जनपद की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समेत तमाम पहलुओं से रुबरु कराना है।
त्रेतायुग युग लेकर महाभारत काल तक ग्रंथों तक बिजनौर की धरती का जिक्र मिलता है। रामायण काल में यह जगह उत्तरापथ कहलाती थी। महाभारत काल में यह पुरु क्षेत्र भी कहलाया। कण्व आश्रम और किला मोरध्वज आज भी महाभारत कालीन होने की पुख्ता गवाही दे रहे हैं।
अब बिजनौर कहलाने वाला जनपद मुगलकाल में मुरादाबाद में शामिल था। साल 1817 में इसे मुरादाबाद से अलग करते हुए नगीना जनपद की स्थापना की गई। उधर, मेरठ छावनी से दूर होने की वजह से जिला मुख्यालय को नगीना से हटाकर साल 1824 में बिजनौर लाया गया। हालांकि साल 1837 तक जिला नगीना ही कहलाया गया। इसके बाद अधिकारिक तौर पर जनपद को नाम बिजनौर मिला।
अब आठ से 10 नवंबर 2024 को स्थापना के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बिजनौर महोत्सव पूर्ण भव्यता के मनाया जाएगा। महोत्सव के आयोजन के संदर्भ में स्थल निर्धारण, विभिन्न कार्यक्रमों के निर्धारण, विभागीय स्टॉल, कलाकारों के चयन आदि बिंदुओं पर खाका तैयार हो चुका है। संवाद