गुलदारों का बढ़ता वजन इंसानों के लिए खतरा
जिले में अब तक मिले सभी गुलदार सेहतमंद मिले हैं। आमतौर पर 60 से 65 किलो वजन का रहने वाला गुलदार अब 90 किलोग्राम तक का हो रहा है। ऐसे अधिक वजन वाले गुलदार जानवरों के पीछे दौड़ने में अक्षम होते जा रहे हैं तो इंसानों पर हमले करने लग जाते हैं। नगीना और अफजलगढ़ और चांदपुर क्षेत्र में पकड़े गए तीनों नरभक्षी गुलदार 80 किलोग्राम से ज्यादा के थे।
इन परिस्थितियों में खतरनाक हो रहे गुलदार
-घायल होने पर गुलदार इंसानों पर हमले करने लगता है
-बढ़ती उम्र के साथ भी गुलदार नरभक्षी बनने लगता है
-कैनाइन मुंह के बड़े दांत टूटने पर भी गुलदार इंसानों पर हमला करता है
-एक बार इंसानी मांस चखने के बाद भी गुलदार नरभक्षी बन जाता है
गन्ने के खेतों से नहीं जाएगा गुलदार : जोएल लायल
जिम कार्बेट रिसर्च स्कॉलर जोएल लायल कहते हैं कि गुलदार जंगल का सबसे धूर्त जानवर है। यह छिपकर हमला करने में माहिर होता है। बिजनौर में अब यह गन्ने के खेतों से नहीं जाने वाला है। यहां जिन शावकों ने जन्म लिया है, उनके लिए यही घर है। यहीं पर यह अपना क्षेत्र बना रहा है, इसलिए ही लगातार गुलदारों का दायरा बढ़ रहा है।
हम प्रयास कर रहे हैं
जिले में 87 गांव संवेदनशील है। हम लगातार गुलदार पकड़ रहे हैं। लोगों को जागरुक भी कर रहे हैं। 160 पिंजरे जिलेभर में लगाए गए हैं। इसके अलावा विशेषज्ञों से ठोस रणनीति तैयार कराई जा रही है। - ज्ञान सिंह, बिजनौर डीएफओ