-सीएए की अधिसूचना जारी होने का सभी धर्मो के लोगों ने किया स्वागत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। यूं तो साल 2019 में केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून को राष्ट्रपति ने मंजूरी ने दी थी लेकिन उस वक्त के हालातों के चलते इसे लागू नहीं किया जा सका। साल 2019 में ही इस कानून के विरोध में प्रदर्शन भी हुए। बिजनौर भी बवाल हुआ था, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी। करीब पांच हजार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। अब भारत सरकार ने सोमवार को सीएए की अधिसूचना जारी कर दी। जिसे सभी धर्म के लोगों ने बेहतर और तीन देशों से आए अल्पसंख्यकों के लिए लाभकारी बताया है।
हरदीप सिंह का कहना है कि सीएए कानून विदेश में रह रहे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए बेहतर कानून है। पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों में रह रहे सिख लोगों की स्थिति दयनीय है। इस कानून के सहारे देश में ऐसे लोगों को सहारा मिलेगा जो विदेश में दयनीय स्थिति में जीवन गुजार रहे हैं।
आकाश जैन का कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून लागू करके सरकार ने अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करने का प्रयास किया है। सरकार की सराहनीय नीति है। सरकार द्वारा लागू किए गए कानून से देश के बाहर रह रहे अल्पसंख्यकों को अपने पुरखों की जमीन पर लौटने का सुख मिलेगा
सचिन कुमार बौद्ध का कहना है कि भारत का नागरिकता संशोधन कानून अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करने के लिए बनाया गया है। पड़ोसी तीन देशों में अल्पसंख्यक होने के बाद पीड़ित होने वाले लोग इस कानून से लाभान्वित होंगे। कानून सरकार की सराहनीय पहल है।
मैथोडिस्ट चर्च के फादर डॉ. सीएम डेनियल ने बताया कि अच्छे काम की शुरुआत किसी ना किसी तारीख को होती है। अब यह कानून लागू हुआ है तो भारत सरकार की लंबी सोच है, आने वाले समय के लिए। इस कानून प्रभावी होने के बाद धीरे धीरे परिणाम आएंगे।
सीएए नागरिकता लेने का नहीं बल्कि नागरिकता देने का कानून है। इससे मुसलमानों की नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा, भ्रमित नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानव प्रेमी चेहरा पूरे विश्व को दिखाया है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित तीन देशों में पीड़ित अल्पसंख्यक को यहां नागरिकता देकर पूरे विश्व के अंदर मिसाल कायम की है। यह संविधान का हिस्सा है क्योंकि देश के विभाजन के वक्त जो लोग वहां रह गए थे, वो बाद में यहां आए तो उन्हें नागरिकता मिलेगी। यह महात्मा गांधी ने भी कहा था कि जो लोग उधर रह गए है और उन्हें भारत में आने पर नागरिकता मिलेगी।.......मुफ्ती शमून कासमी, अध्यक्ष मदरसा शिक्षा परिषद उत्तराखंड