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जिले को गंगा सर्किट में शामिल करने से बहेगी विकास की बयार

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बिजनौर के बालावाली का पुराना पुल। - फोटो : BIJNOR
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बिजनौर। बिजनौर से बलिया तक गंगा सर्किट बनाने की कवायद चल रही है। बिजनौर के बालावाली, महात्मा विदुर की कुटी व गंगा बैराज को गंगा सर्किट में शामिल करने के बाद कॉरीडोर बनाने का बीड़ा उठाया गया है। ये आपस में जुड़े तो धार्मिक पर्यटन बढ़ने के साथ जिले में विकास की नई बयार बहेगी। पर्यटन के पटल पर बिजनौर अलग से चमकेगा।
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बिजनौर से बलिया तक गंगा किनारे के 27 शहरों व जिलों के धार्मिक स्थलों को गंगा सर्किट के रूप में विकसित करने की कवायद शुरू हो गई है। पर्यटन विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। बिजनौर के महात्मा विदुर की कुटी, बालावाली, व व गंगा बैराज को गंगा सर्किट में शामिल करने की कवायद चल रही हैं। जिले में धार्मिक स्थलों को गंगा से जुड़ने से जिले में पर्यटन केंद्र के रूप में ये विकसित होंगे। तमाम पर्यटकों की फिर यहां आने की संभावना है। महात्मा विदुर की कुटी गंगा से कुछ दूरी पर गंज दारानगर में है। महाभारत काल के दौरान भगवान कृष्ण ने इस कुटी पर ही दुर्योधन की मेवा को त्यागकर बथुए का साग खाया था। विदुर कुटी को पर्यटन केंद्र बनाने की पहले से ही कवायद चल रही है। जिले के साथ बाहर से आने वाले लोग अभी भी इस कुटी के दर्शन् करने के लिए जाते हैं।
फैक्टरी और पुल हैं दर्शनीय
यहां गंगा पर रेलवे का 1888 में बना ऐतिहासिक पुल है। रेलवे ने इसे 2001 में रिटायर कर प्रदेश सरकार को सौंप दिया। प्रदेश सरकार ने 128 साल पुराने पुल को 2016 में सड़क यातायात के लिए खोला। 1888 में एक किमी मीटर लंबे पुल के निर्माण पर 27 लाख 94 हजार की लागत आई थी। यहां 1923 में बनी अपने समय की एशिया की सबसे बड़ी गंगा ग्लास वर्क्स है। कांच के सामान बनाने वाली यह फैक्टरी 72 साल सेवा देकर 1995 में बंद हो गई। 500 बीघा में बनी इस फैक्टरी में उस समय 2500 से ज्यादा श्रमिक काम करते थे। पंजाब के होशियार पुर के रहने वाले इंजीनियर विष्णु दत्त द्वारा स्थापित यह फैक्टरी दर्शनीय स्थल है।
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हस्तिनापुर अभ्यारण्य में बारहसिंघा
बालावाली से बिजनौर चांदपुर गजरौला तक बने मार्ग का गंगा साइड का क्षेत्र हस्तिनापुर अभ्यारण्य में आता है। यहां बारह सिंघा पाए जाते हैं। बिजनौर के अलावा बारह सिंघा लखीमपुर में मिलते हैं। गंगा क्षेत्र में सर्दियों में बड़ी तादाद में विदेशी पक्षी आते हैं। गंगा के दूसरी और मुजफ्फरनगर क्षेत्र में वत्य प्राणियों के लिए हैदरपुर वेडलैंड बना है, जो पक्षी प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान है।
पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित हो रहा बैराज
गंगा बैराज हाइवे से जुड़ा होने के कारण बिजनौर के साथ मुजफ्फरनगर जिले के भी काफी श्रद्धालु यहां स्नान को आते हैं। घाट सुंदर बने होने और रोशनी की बढ़िया व्यवस्था होने के चलते गर्मियों में लोग पिकनिक मनाने भी बैराज पर पहुंचते हैं। रोजाना शाम होने वाली गंगा आरती में भी भीड़-भाड़ रहती है। बैराज गंगा पर मोटर वोट चलने से अब खूब लोग वहां पहुंचने लगे हैं। मोटर वोट से लाग विदुर कुटी तक खूब नौका विहार करते है।
कॉरीडोर बनाने की उठी मांग
भाजपा के जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि ने गंगा बैराज और विदुर कुटी को विकसित करने की मुख्यमंत्री से मांग की है। उन्होंने गंगा बैराज के बिजनौर साइड के बंदे में जमा पानी में वाटर स्पोर्ट्स विकसित करने को भी कहा है। जिलाध्यक्ष के मुताबिक उन्होंने बैराज, विदुर कुटी व बालावाली को गंगा सर्किट में शामिल करके कॉरीडोर बनाने की मांग की है। सदर विधायक सुचि चौधरी मौसम व पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह ने भी इसका बीड़ा उठाया हैं।
एमडी कॉलेज आफ हायर एजुकेशन के एमडी विदित कुमार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर बिजनौर बैराज से विदुर कुटी तक कॉरीडोर बनाने की मांग की हैं।

बिजनौर में बैराज के पास हैदरपुर वैटलैंड में घूमता बारहसिंघा का झुंड (फाइल फोटो)।- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के गंज में स्थित विदुर कुटी।- फोटो : BIJNOR

बिजनौर में बालावाली का निर्माणाधीन पुल।- फोटो : BIJNOR

बिजनौर में गंगा बैराज का पुल।- फोटो : BIJNOR

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