बिजनौर। भले ही साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने बिजनौर और नगीना सुरक्षित सीट पर जीत दर्ज की थी। मगर, इस बार के लोकसभा चुनाव में बसपा ने अपना जनाधार खो दिया। दोनों सीटों पर ही बसपा के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर बने रहे।
साल 2019 में बसपा, सपा, रालोद गठबंधन ने बिजनौर जनपद की दोनों लोकसभा सीटों पर भाजपा की लहर को रोक दिया था। गठबंधन में शामिल बसपा के प्रत्याशी मलूक नागर ने बिजनौर लोकसभा सीट 561,045 मतों से जीत हासिल की थी। जबकि नगीना सुरक्षित लोकसभा सीट से गिरीश चंद 568378 मत प्राप्त कर विजेता बने थे। वहीं वर्ष 2014 में भाजपा की लहर में बिजनौर जनपद की दोनों बिजनौर एवं नगीना सुरक्षित लोकसभा सीट पर भाजपा जीती थी। बिजनौर लोस सीट से भारतेंद्र सिंह व नगीना सीट से डॉ. यशवंत सिंह ने जीत हासिल की थी। मगर साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाजवादी पार्टी इतिहास नहीं दोहरा पाई। नगीना आरक्षित सीट से आजाद समाज पार्टी के उम्मीद चंद्रशेखर 512552 वोट पाकर विजेता बने। जबकि बिजनौर लोकसभा सीट से भाजपा, रालोद गठबंधन प्रत्याशी चंदन चौहान ने 402613 मत पाकर जीत दर्ज की। नगीना सीट से बसपा के कोर वोटर का फायदा चंद्रशेखर को मिला। दोनों सीटों पर बसपा को उम्मीद से भी वोट हासिल हुए।
नगीना सीट पर बसपा को मिले 1.33 प्रतिशत मत-
लोकसभा चुनाव 2024 का परिणाम चार जून को आ गया। नगीना सीट पर बसपा प्रत्याशी सुरेंद्र पाल सिंह को 13272 वोट ही मिल पाए। जो डाले गए कुल वोट का 1.33 प्रतिशत है। वहीं बिजनौर लोकसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी बिजेंद्र सिंह भी तीसरे स्थान पर रहे। बिजेंद्र सिंह को 218986 मत मिले। जो डाले गए मतों का 21.38 प्रतिशत है।
बिजनौर सीट पर एक बार भी खाता नहीं खोल पाई सपा-
बिजनौर सीट साल 2009 में बनी थी। पहली बार सीट से जनता ने भाजपा और रालोद के गठबंधन से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी संजय चौहान को विजयी बनाया था। इसके बाद साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बिजनौर सीट से भाजपा के भारतेंद्र सिंह विजेता रहे। जबकि साल 2019 में गठबंधन से बसपा के मलूक नागर प्रत्याशी बने। जिन्हें जीताकर जनता ने संसद में भेजा। जबकि भाजपा प्रत्याशी को चुनाव में शिकस्त मिली थी।