अपशिष्ट निवारण सेंटरों के लिए जमीन की तलाश
बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणाओं पर अमल शुरू हो गया। गंगा किनारे के गांवों में ठोस तथा तरल अपद्रव्य निस्तारण केंद्र बनेंगे। प्रशासन ने इसके लिए भूमि का चिह्निकरण का काम शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने 27 जनवरी को बिजनौर से गंगा यात्रा का शुभारंभ किया था। सीएम का संदेश पूरी तरह गंगा की निर्मलता पर केंद्रित था। कहा था कि गंगा में हर तरह की गंदगी को जाने से रोका जाएगा। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि गंगा किनारे के 22 ग्राम पंचायतों के 90 गांव में एसएलडब्ल्यूएमएन सेंटर बनेंगे। सेंटरों पर ठोस और तरल कूडे़ के निस्तारण की व्यवस्था होगी। मिट्टी में विलेय ठोस कूड़े जैसे छिलके आदि का कंपोस्ट खाद बनेगा। प्लास्टिक आदि अविलेय अपशिष्टों को छांटकर अलग किया जाएगा। योजना पर काम शुरू हो गया है। सेंटर के ग्राम पंचायत की जमीनों को चिह्नित किया जा रहा है। मोहम्मदपुर देवमल ब्लाक के सहायक विकास अधिकारी पंचायत रविकांत ने बताया कि गंगा किनारे के गांवों में खाद के पक्के गड्ढे बनने शुरू हो गए हैं। एक गांव में कम से कम चार गड्ढे बनेंगे। इन गड्ढों में ग्रामीण सार्वजनिक कूड़ा डाल सकेंगे। गड्ढा भर जाने पर खाद डिस्पोजल की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की होगी। गड्ढा जालीदार शेप में बन रहा है। एक गड्ढे के निर्माण पर नौ से बारह हजार का खर्च आएगा। गांव की आबादी के अनुसार गड्ढों की संख्या बढ़ सकती है।