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आखिर झुकी सरकार: किसानों की बड़ी जीत पर क्या बोले दिग्गज, पढ़िए पश्चिमी यूपी से अहम प्रतिक्रियाएं

Fri, 19 Nov 2021 07:36 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह अचानक किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लिया तो दिग्गज नेताओं की कृषि कानूनों को लेकर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई। पढ़िए पश्चिमी यूपी से क्या बोले दिग्गज नेता।
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कृषि कानून के फैसले पर खुशी मनाते किसान। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सरकार द्वारा कृषि कानून वापस लेने के फैसले का किसानों ने संगठित होकर चलाए गए किसानों के राष्ट्रव्यापी आंदोलन को श्रेय दिया है। किसानों ने सरकार के निर्णय को किसानों की भावनाओं के अनुरूप बताते हुए फैसले का स्वागत किया।

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- आजाद किसान यूनियन युवा के जिलाध्यक्ष गुरजीत सिंह रंधावा ने कहा कि कृषि कानून वापस लेने का फैसला किसान युग के शुरुआत होने का संकेत देता है। कानून वापस लेकर सरकार झुकी है। अब कोई भी फैसला लेते समय किसान हित की अनदेखा नहीं करेगी। 

- बिजौरी के पूर्व प्रधान एवं बसपा नेता हरप्रीत सिंह संधू ने कहा कि किसानों का संघर्ष और कुर्बानी रंग लाई है। एमएसपी कानून बनने पर ही सरकार के किसान हित की सोच स्पष्ट होगी। 
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- भाजपा किसान मोर्चा के नगर अध्यक्ष राकेश कौशिक और मास्टर रमेश सिंह ने कहा कि कृषि कानून के प्रति विपक्षी दलों ने भ्रम की स्थिति पैदा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने कानून वापस लेकर अन्नदाता किसानों की भावनाओं को सम्मान दिया है।  

- भाकियू के तहसील अध्यक्ष सरदार इकबाल सिंह ने कहा कि फैसला देर से लिया गया है। आंदोलन के दौरान अनेक किसानों को जान गंवानी पड़ी। उन्होंने एमएसपी कानून जल्द बनाने की सरकार से अपेक्षा की। 

- राष्ट्रीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल तोमर ने कहा कि किसानों की लंबी लड़ाई और कुर्बानी के आगे सरकार ने घुटने टेके हैं। पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की सरकार की साजिश फैसले से नाकामयाब हुई है। 

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विधायक ने कहा... 
- कृषि कानून देश के अन्नदाता किसानों को पूंजीपतियों के हाथों गिरवी रखने का काला कानून था। किसानों के त्याग और बलिदान ने सरकार को कानून वापस लेने के लिए मजबूर किया। समाजवादी पार्टी शुरू से ही कृषि कानून के विरोध में किसान हित में आवाज बुलंद कर आंदोलन के समर्थन में रही। - हाजी तसलीम अहमद, विधायक समाजवादी पार्टी नजीबाबाद

किसान सही थे, गलत थी सरकार : राशिद हुसैन
सपा जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन ने कहा कि तीनों कृषि कानून वापस लेने के एलान ने यह साबित कर दिया कि किसान सही थे, सरकार गलत थी। सरकार की हठधर्मिता के कारण आंदोलन चला। इसमें तमाम किसान शहीद हुए। फसलों का नुकसान हुआ। अब कानून वापस ले रहे हैं। आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों को सरकार 50 लाख का मुआवजा, फसलों का मुआवजा दें। वहीं निर्णय पर बात करें तो यह चुनावी स्टंट नजर आ रहा है। भाजपा की नजर किसानों की जमीनों पर है। कृषि कानून की तरह अन्य कई ऐसे कानून हैं, सरकार को उन पर भी विचार करना चाहिए। 

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किसानों और संयुक्त मोर्चा की बड़ी जीत : अली अदनान
रालोद जिलाध्यक्ष अली अदनान ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी किसानों व संयुक्त मोर्चा की बड़ी जीत है। वह भाजपा सरकार के अहंकार की पराजय है। किसान आंदोलन के चलते अपने जायज हक को मांगते हुए जिन किसानों ने अपनी जान दे दी, उनकी शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अब देखना यह है कि इन कानूनों को खत्म करने की घोषणा को सरकार द्वारा अमली जामा पहनाया जाता है या नहीं। 

सोच समझकर लिया निर्णया : सुभाष वाल्मीकि
भाजपा जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सोच समझकर ही निर्णय लिया है। किसानों के हित तो देखते हुए कृषि कानून लाए गए थे, किसानों के हित को देखते हुए ही वापस लिए जा रहे हैं। हम प्रधानमंत्री के निर्णय के साथ हैं।
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