विधायक ने कहा...
- कृषि कानून देश के अन्नदाता किसानों को पूंजीपतियों के हाथों गिरवी रखने का काला कानून था। किसानों के त्याग और बलिदान ने सरकार को कानून वापस लेने के लिए मजबूर किया। समाजवादी पार्टी शुरू से ही कृषि कानून के विरोध में किसान हित में आवाज बुलंद कर आंदोलन के समर्थन में रही।
- हाजी तसलीम अहमद, विधायक समाजवादी पार्टी नजीबाबाद
किसान सही थे, गलत थी सरकार : राशिद हुसैन
सपा जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन ने कहा कि तीनों कृषि कानून वापस लेने के एलान ने यह साबित कर दिया कि किसान सही थे, सरकार गलत थी। सरकार की हठधर्मिता के कारण आंदोलन चला। इसमें तमाम किसान शहीद हुए। फसलों का नुकसान हुआ। अब कानून वापस ले रहे हैं। आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों को सरकार 50 लाख का मुआवजा, फसलों का मुआवजा दें। वहीं निर्णय पर बात करें तो यह चुनावी स्टंट नजर आ रहा है। भाजपा की नजर किसानों की जमीनों पर है। कृषि कानून की तरह अन्य कई ऐसे कानून हैं, सरकार को उन पर भी विचार करना चाहिए।
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किसानों और संयुक्त मोर्चा की बड़ी जीत : अली अदनान
रालोद जिलाध्यक्ष अली अदनान ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी किसानों व संयुक्त मोर्चा की बड़ी जीत है। वह भाजपा सरकार के अहंकार की पराजय है। किसान आंदोलन के चलते अपने जायज हक को मांगते हुए जिन किसानों ने अपनी जान दे दी, उनकी शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अब देखना यह है कि इन कानूनों को खत्म करने की घोषणा को सरकार द्वारा अमली जामा पहनाया जाता है या नहीं।
सोच समझकर लिया निर्णया : सुभाष वाल्मीकि
भाजपा जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सोच समझकर ही निर्णय लिया है। किसानों के हित तो देखते हुए कृषि कानून लाए गए थे, किसानों के हित को देखते हुए ही वापस लिए जा रहे हैं। हम प्रधानमंत्री के निर्णय के साथ हैं।