गरीबी इंसान को वह सब करने के लिए मजबूर कर देती है, जिसे करने की वह सपने में भी नहीं सोच सकता। बिजनौर के धामपुर में कस्बा निवासी एक व्यक्ति की पत्नी एक साल पहले तीन बच्चों को छोड़कर किसी के साथ चली गई। किसी तरह दो वक्त की रोटी जुटाकर वह बच्चों को पाल रहा था, इस दौरान हादसे में बडे़ भाई के पैर की हड्डी टूट गई। डॉक्टरों ने कह दिया कि पैर काटना पडे़गा और इलाज में पैसे भी अधिक लगेंगे। आरोप है कि भाई की जान बचाने के लिए उसने अपने तीन साल के बेटे को डेढ़ लाख रुपये में बेच दिया। पुलिस का कहना है कि उस व्यक्ति को बच्चा वापस दिला दिया है और मामले की जांच की जा रही है।
नगर के एक मोहल्ले में मजदूर अपने परिवार के साथ किराए पर रहता है। उसके तीन बेटे हैं। एक वर्ष पहले पत्नी बच्चों को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली गई। कोरोना कर्फ्यू के दौरान काम न मिलने के कारण उसे बच्चों का पालन पोषण करना भारी पड़ रहा था। ऐसे में भाई की जान बचाने के लिए पैसों का इंतजाम करने की मुसीबत उसके सामने आ खड़ी हुई। बताया जा रहा है कि उसे जो रकम मिली उससे उसने एक ई-रिक्शा खरीदी। बाकी रकम से भाई के पैर का इलाज करा रहा है। उसने बताया कि आज तक किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सका है। मोहल्ले का राशन डीलर भी उसे उसकी गरीबी को देखते हुए बगैर राशन कार्ड के ही हर माह राशन देता आ रहा है। कोतवाल राज कुमार शर्मा ने बताया कि बच्चे के पिता से पूछताछ के आधार पर बच्चे को खरीदार के यहां से लाकर उसकी सुपुर्दगी में दिला दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
परिवार की मदद कराई जाएगी : एसडीएम
एसडीएम धीरेंद्र सिंह का कहना है कि परिवार की जांच करा उसकी हर संभव मदद की जाएगी। यदि इस व्यक्ति के घर में गरीबी थी तो उसे प्रशासन के संज्ञान में लाना चाहिए था। जांच के बाद उसकी मदद होती। लेकिन इस तरह अपने बच्चे को बेचना और किसी के द्वारा खरीदना अपराध है। इस मामले में जांच कर कार्रवाई होगी।