गनीमत रही कि हमले से अंशु बाल-बाल बच गई। शोर मचाने पर गुलदार गन्ने के खेत में घुस गया। गुलदार के भय से खेती का काम छोड़ कर वह गांव में पहुंचा। ग्रामीणों को एकत्र कर शेष गेहूं की फसल की सिंचाई की। इसी दौरान आवारा घूम रहे एक बछड़े को गुलदार ने निवाला बना लिया।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पिछले कई दिनों से गुलदार का आतंक है। कई गुलदार जंगल में विचरण करते नजर आ रहे है।
किसानों का आरोप है कि सूचना के बाद भी वन विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे है। कहते है कि जब जंगल में गुलदार है तो जंगल में न जाए, घर पर रहें। वहीं स्थनीय लोगों को कहना है कि यदि वे वन विभाग के अधिकारियों के सुझाव पर चलें तो उन्हें रोटी के भी लाले पड़ जाएंगे। उनकी खेती चौपट हो जाएगी।
वहीं किसानों का कहना है कि वन विभाग को किसी बड़ी घटना का इंतजार है, अधिकारी सूचना के बाद भी मौके पर नहीं पहुंचते हैं। उधर सामाजिक वानिकी के वन क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र सिंह भोरा का कहना है कि ग्रामीणों ने कोई सूचना नहीं दी। यदि ऐसा है तो टीम को भेजकर गुलदार की लोकेशन लेकर पिंजरा लगाया जाएगा।