गुरुवार सुबह करीब पांच बजे एक बंदी बाथरूम गया तो उसने बाथरूम के रोशनदान में नरपाल का शव लटका देख शोर मचाया। रोशनदान में नरपाल का लोअर बंधा था। लोअर का फंदा नरपाल के गले में था जिससे शव लटका था। बाथरूम का दरवाजा खुला था। कैदी का शव लटका देख जेल प्रशासन के हाथ -पांव फूल गए। जेल अधिकारियों के अलावा डीएम रमाकांत पांडेय व एसपी डा. धर्मवीर सिंह ने जेल के बाथरूम का निरीक्षण किया। शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
नरपाल को छह दिसबंर 2010 को कोर्ट ने आजीवान कारावास की सजा सुनाई थी। 28 अप्रैल 2012 को उसे बिजनौर जेल से बरेली सेंट्रल जेल भेजा गया था। नरपाल बरेली जेल मे नंबरदार था। जेल में उसकी 12 साल की सजा पूरी हो गई थी। तीन साल बाद जेल से बाहर आने की उम्मीद थी। एसपी डा. धर्मवीर सिंह के मुताबिक नरपाल ने जेल में फांसी लगाकर खुदकशी की है।
पति ने लगाया कैदी की हत्या का आरोप, कहा-जेल से भगाने में रहा एक अधिकारी का हाथ
नरपाल की पत्नी कोमल ने आरोप लगाया कि उसके पति की जेल प्रशासन व पुलिस ने मिलकर हत्या की है। उसे पति से नहीं मिलने दिया गया। जेल से भगाने में बरेली जेल के एक अधिकारी का हाथ रहा है। पहले नरपाल को जेल से भगाया। अब उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने उसे झूठे मामले में पहले ही जेल भेजा था। अब उसे घर तक नहीं जाने दिया।
वह जेल से फरार होने के बाद परिवार के किसी सदस्य से नहीं मिला। नरपाल को जेल से भागना था तो तब भागता जब उसके पिता मां व भाभी की मौत हुई थी। अब क्यों भागता। बुधवार को प्रधान के माध्यम से उसे किरतपुर थाने बुलाया गया पर महिला पुलिस कर्मियों ने पति से नहीं मिलने दिया। उसे धक्का देकर भगा दिया। नरपाल के एक 13 साल का बेटा व छोटी बेटी हैं।
परिजनों के मुंह मोड़ने से टूट गया था नरपाल
जेल अधिकारियों के मुताबिक कैदी नरपाल से परिजनों ने भी मुहं मोड़ लिया था। उसने मिलने भी बरेली जेल कोई नहीं जा रहा था। इस बात से नरपाल बुरी तरह टूट गया था। बरेली जेल से फरार होने से एक दिन पहले नरपाल से जेल के पीसीओ से भाई से बात की थी। भाई ने कहा था कि जब छुट्टी मिलेगी तो वह मिलने आएगा। भाई से नरपाल वकील करने की भी बात की थी। पैसे भिजवाने का भी जिक्र किया था। नरपाल भाई से बात करने के बाद बुरी तरह टूट चुका था। तब उसे जेल से फरार होने की योजना बनाई थी।
परिजनों से नहीं मिलने का मलाल था
बुधवार शाम बिजनौर की अस्थाई जेल पहुंचने के बाद से नरपाल गुमसुम था। उसने किसी बंदी से कोई बात नही की। जेल में दाखिल होने के दौरान जेल के स्टाफ से उसने कहा था कि उसके दिमाग में क्या हो गया था जो वह जेल से भागा। घर वालों से नहीं मिलने का उसे बेहद मलाल था। कहा कि जेल से भागने के बाद भी वह परिजनों से नही मिल पाया।
खुद पुलिस के जाल में फंसा नरपाल
मंगलवार को फरारी के बाद नरपाल घर जाना चाहता थ। वह किसी तरह किरतपुर तक पहुंच गया। रात में गांव जाने के लिए किरतपुर में मोतीचूर चौराहे पर खड़ा था। पुलिस की वहां से गुजर रही गाड़ी को नरपाल ने हाथ दिया व गांव जाने के लिए मदद मांगी। पुलिस वालों ने नरपाल के वायरल हुए फोटो से उसे पहचान लिया और गाडी में बैठाकर थाने ले आई। यह बात नरपाल ने जेल जाने के बाद बताई ।
दम घुटने से हुई मौत
नरपाल की मौत जेल में दम घुटने से हुई हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ हैं।