कैसे निर्मल होगी गंगा : बीच धारा में की जा रही खेती, पेस्टीसाइट का हो रहा प्रयोग
बिजनौर/गजरौलाशिव। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गंगा की धारा को निर्मल बनाने के लिए 27 जनवरी को बिजनौर आ रहे हैं। प्रशासन गंगा किनारे के गांवों में सफाई अभियान चलाया जा रहा है लेकिन गंगा की धारा के बीच में छोड़ी गई रेत में अभियान के बाद होने वाली खेती की ओर किसी का ध्यान नहीं है। किसानों ने सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से खेती करने की तैयारी अभी से शुरू कर दी है।
गंगा की धारा को निर्मल बनाए रखने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। गंगा किनारे बसे गांवों में किसानों को जैविक खेती से जोड़ा जा रहा है। लेकिन गंगा की धारा के बीच में जमीन पर अवैध तरीके से की जा रही खेती पर किसी का ध्यान नहीं है। जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करके खेती की शुरूआत कर ली गई है। किसान खेतों में रासायनिक खाद व पेस्टीसाइट का अंधाधुंध प्रयोग करते हैं। रसायन फसल के अवशेषों व मिट्टी के जरिए गंगा में जाते हैं। इससे गंगा तो प्रदूषित होती ही है, गंगा में जलजीवों का जीवन भी खतरे में रहता है। मुख्यमंत्री 27 फरवरी से गांव सबलगढ़ से गंगा यात्रा का शुभारंभ करेंगे। गंगा यात्रा गंगा के किनारे बसे गांवों से होकर जाएगी। प्रशासन द्वारा की जा रही लाख तैयारियों के बाद भी किसानों ने गंगा की धारा के बीच में छोड़ी गई रेती पर फसल बोने की तैयारी कर ली है। प्रशासन के सामने ही खेतों को फसल बोने के लिए तैयार किया जा रहा है। एसडीएम बृजेश कुमार का कहना है कि गंगा की धारा की जमीन में किसी को खेती नहीं करने दी जाएगी। मामले को दिखवाया जा रहा है। अगर किसी विभाग के कर्मचारी की इस मामले में संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
बोई जाती हैं कई फसल
गंगा में इस समय किसान पलेज बोने की तैयारी कर रहे हैं। इस समय की फसल में खीरा, ककड़ी, खरबूजा, तरबूज, भिंडी आदि फसल बोई जाती हैं। इसके अलावा गेहूं, धान, गन्ना भी बड़े रकबे में बोया जाता है।
तीन विभागों की जमीन
गंगा किनारे वन विभाग, राजस्व व सिंचाई विभाग की जमीन है। विभाग के कर्मचारी किसानों से फसल बुआने के बदले वसूली करते हैं। गंगा की जमीन पर खेती करने के बदले प्रति बीघा जमीन पर डेढ़ हजार रुपये तक लिए जाते हैं।
राजनीतिक दलों का रहता है कब्जा
गंगा की जमीन पर राजनीतिक दलों के नेताओं का भी कब्जगा रहता है। ये खुद भी खेती करते हैं और किसानों को भी जमीन पलेज पर देते हैं। सरकारी जमीन पर कब्जा करके ये नेता किसानों से पैसे लेकर उन्हें खेती करने देते हैं। नेता अफसरों के साथ मिलकर ये खेल खेलते हैं। मुख्यमंत्री गंगा बैराज के पास सभा करेंगे। इसलिए प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए इस बार गंगा बैराज पर पलेज नहीं लगने दी है। हर साल गंगा बैराज पर बड़ी तादाद में पलेज लगती रही है।