कोटावाली गांव निवासी आराम सिंह ने अपने आठ माह के बेटे को ई-रिक्शा खरीदने के लिए एक लाख 80 हजार रुपये में बेच दिया। बाद में पछतावा हुआ तो बेटे को वापस पाने के लिए पुलिस से गुहार लगाई। पुलिस ने मासूम को सकुशल बरामद कर बच्चे को खरीदने वाले दंपती और दो बिचौलियों को गिरफ्तार किया है। वहीं अपने ही बच्चे को बेचने वाले आराम सिंह पर कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है।
एएसपी सिटी डॉ. केजी सिंह ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि 29 अक्तूबर को गांव कोटावाली निवासी आराम सिंह ने तहरीर दी थी। बताया कि वह श्यामीवाला निवासी शमशेर और खुर्शीद की ई-रिक्शा किराये पर चलाता था। नई ई-रिक्शा खरीदने के लिए रुपयों की जरूरत थी। उसने शमशेर और खुर्शीद से बात की तो उन्होंने उसे आठ माह के बेटे को बेचने का सुझाव दिया। वह उनकी बातों में आ गया।
इसके बाद आरोपियों ने कोतवाली थाना क्षेत्र के गांव खुशहालपुर मठेड़ी निवासी देवराज सिंह और उसकी पत्नी सुनीता को 1.80 लाख रुपये में बच्चा खरीदने को तैयार कर लिया। बीती तीन अक्तूबर को सौदा हो गया। बच्चे को खरीदने वाले देवराज की छह बेटियां हैं। पुत्र की चाहत में उसने मासूम को खरीदकर श्यामीवाला में रिश्तेदारी में छिपा दिया था।
बाद में बेटे के बिछोह पर पिता को गलती का अहसास हुआ तो उसने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। एएसपी सिटी ने बताया कि प्रकरण से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। वहीं अपने बच्चे को रुपये के लिए बेचने वाले आराम सिंह पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसके अलावा दंपती को रुपये लौटाने पर भी कोई बात नहीं हुई है।
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