रविवार को पानी ने नारनौर के पास गंगा नदी पर बने पुल के अंतिम पिलर और अप्रोच रोड की ओर कटान करना शुरू किया। सोमवार सुबह अंतिम पिलर पर जुड़ा करीब 15 फीट सड़क का हिस्सा गंगा में समा गया। इसके चलते इस मार्ग पर यातायात बंद हो गया। मेरठ से अमरोहा, चांदपुर, मुरादाबाद, धामपुर और बिजनौर से दिल्ली मेरठ जाने के लिए अब लगभग 60 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर बिजनौर बैराज से होकर जाना पड़ेगा। अप्रोच सड़क टूटने से गंगा पार खेतीहर किसानों को अपने खेतों पर आने जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
11 माह पहले भी बह गई थी अप्रोच सड़क
पिछले साल 30 जुलाई को गंगा का जल स्तर बढ़ने पर हस्तिनापुर गंगा पुल के निकट अप्रोच सड़क धंस कर पानी के साथ बह गई थी। कई माह तक इस पुल से आवागमन बंद रहा था, दिसंबर माह में गन्ना पिराई सत्र शुरू होने पर गंगा का रेत मिट्टी आदि से कटी सड़क के स्थान को भरकर फिर से वाहन चलने लायक बना दिया गया था। तब से बंद पड़ा काम करीब तीन सप्ताह पहले फिर से शुरू कर सड़क पर तारकोल बजरी आदि का लेपन कार्य व कटान रोकने के लिए दोनों तरफ बोल्डर पत्थर लगाए गए थे। सड़क का काम पूरा हुए अभी एक सप्ताह भी नहीं हुआ है। पहाड़ों व मैदानी क्षेत्र में मानसून की पहली बारिश में गंगा का जलस्तर बढ़ते ही जैसे ही पानी की धार पुल के किनारों तक पहुंची सड़क में कटान शुरू हो गया। सोमवार सुबह लड़के धंसनी शुरू हो गई थी। लगातार कटान के चलते सड़क और पुल के बीच करीब 15 फुट चौड़ी खाई बन गई है। जिसमें पानी की तेज धार चल रही है। लगातार कटान जारी है।
सड़क की गुणवत्ता को लेकर आशंका हुई सच
हस्तिनापुर गंगा पुल की अप्रोच सड़क की गुणवत्ता को लेकर शुरू से ही सवाल उठ रहे थे। नवंबर माह में सड़क बनाने का शुरू हुआ था। जैसे ही सड़क कटे स्थान को गंगा के रेत से भरा जाना शुरू किया गया तभी क्षेत्रीय ग्रामीणों ने सड़क की गुणवत्ता को लेकर शंका जताई थी। ग्रामीणों की शंकाओं को समाचार पत्र में प्रकाशित कर ग्रामीणों की आवाज उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई थी।
अधिकारियों ने पिछले हादसे से भी नहीं लिया सबक
11 माह पूर्व गंगा पुल की अप्रोच सड़क के पहली बार पानी में समा जाने के बाद भी अधिकारियों ने सबक नहीं लिया लिया था। कि अब दुबारा अप्रोच सड़क गंगा के पहले उफान में ही पानी में समा गई। पहली बार जुलाई 2022 को गंगा में अप्रोच सड़क के समा जाने के बाद रोजमर्रा चांदपुर, मेरठ, मवाना, हस्तिनापुर आदि स्थानों पर नौकरी कर रहे कर्मचारियों ने नाव का सहारा लेकर गंगा पार कर अपने काम पर जाने लगे थे। जिसका खामियाजा नाव के गंगा में पलट जाने से हुए हादसे से भुगतना पड़ा था।
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