विश्व साइकिल दिवस
-जिम हो या सड़क स्वस्थ रहने को युवा, बुजुर्ग व्यायाम के तौर पर चला रहे साइकिल
ब्रजवीर चौधरी
बिजनौर। आधुनिकता के इस दौर में लगजरी वाहनों का क्रेज बढ़ा। साइकिल का स्वरूप भी बदला। परंतु लोग आज भी स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम के तौर पर जिम में जाकर या सड़कों पर साइकिल चला रहे हैं। चिकित्सकों व व्यायाम शिक्षकों का कहना है कि साइकिल चलाने से जांघें मजबूत रहती हैं और शरीर में रक्त संचालन सही रहता है।
राजसिंह राठी ने कई बार साइकिल से किए माता वैष्णो देवी के दर्शन
गंगादासपुर निवासी राजसिंह राठी साइकिल पर सवार होकर सन 1997 से अब तक सात से ज्यादा बार माता वैष्णो देवी के दर्शन कर आएं है। इस बीच में जो भी तीर्थ स्थल आते हैं। उनके भी दर्शन करते हैं। एक बार वह विनित, सूरज आदि साथियों के साथ साइकिल से यात्रा की है। उनका कहना है कि वह युवा अवस्था से ही साइकिल चलाते हैं और लोकल व शहर में साइकिल से ही आते जाते हैं।
रोजाना के काम साइकिल से ही करते है विकास
बिजनौर निवासी युवा विकास सेतिया रोजाना साइकिल चलाते ही है, लेकिन जब भी लुधियाना पंजाब जाते हैं, तो वहां किराए पर साइकिल लेकर ही घूमते है। वह रोजमर्रा के कार्य और सैर सपाटा साइकिल से ही करते हैं। बताया कि हर 15 अग्रस्त व 26 जनवरी को वह झंड़ा लेकर करीब 20 किलोमीटर साइकिल से घूमते हैं। वह युवाओं को खेलकूद का प्रशिक्षण भी देते हैं। उनके साथ लवजीत सिंह, हिमांशु चौधरी, कुलदीप सिंह, शिवांश चौधरी, आर्यन पंवार साइकिल चलाते हैं। युवा यंकुर का कहना है कि जिम के साथ वह साइकिल चलाते हैं।
साइकिल चलाने से व्यक्ति की सहनशक्ति मजबूत होती है। यह एक अच्छा व्यायाम है। साइकिलिंग खेल ओलंपिक में भी शामिल है। शारीरिक क्षमता बढ़ती है। साइकिल चलाने से खुले वातावरण में शुद्ध ऑक्सीजन मिलती है। इससे फेफड़ों की भी कार्य क्षमता बढ़ती है। साथ ही व्यक्ति कई प्रकार के रोगों से दूर रहता है। - जयवीर सिंह, जिला क्रीड़ाधिकारी, बिजनौर