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परिवार के सहयोग से कोरोना को मात दी

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परिवार के सहयोग से कोरोना को मात दी
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बिजनौर। पूरा परिवार यदि एकजुट है तो बड़ी से बड़ी मुसीबत को भी टाला जा सकता है। कोरोना महामारी के इस दौर में परिवार के लोग एक-दूसरे का मनोबल बढ़ा रहे हैं। कई लोग परिवार के सहयोग से ही कोरोना जैसी बीमारी को मात देकर घर लौटे हैं।
कुलदीप जखमोला राजकीय आईटीआई बिजनौर में कार्यरत हैं। आईटीआई कैंपस में परिवार के साथ रहते हैं। वे बताते हैं कि वह 15 अप्रैल को कोरोना पाजिटिव हुए और होम क्वारंटीन हो गए। कोरोना को लेकर आ रही तरह तरह की खबरें परेशान करने वाली थीं। परंतु ऐसे में परिवार का सहारा मिला। परिवार के सदस्यों पत्नी व बच्चों ने उनका हौसला बढ़ाया। घर का सकारात्मक वातावरण बना रहा। आज वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। अमित कुमार शर्मा बिजनौर के मोहल्ला शांतिनगर में रहते हैं। कहते हैं कि कोरोना पाजिटिव होने के बाद उनके लिए परिवार बड़ा सहारा बना। खानपान व दवाई के साथ घर का माहौल खुशनुमा बनाए रखा। उन्हें बीमारी का एहसास ही नहीं होने दिया। मित्र भी परिवार का सदस्य होते हैं। राकेश कुमार शर्मा ने उन्हें हौसला दिया। सच है कि परिवार बड़े से बड़े संकट से उबार सकता है।
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प्रकाशवीर रस्तोगी सेवानिवृत्त जूनियर इंजीनियर हैं। बिजनौर के गीता नगरी में रहते हैं। पति, पत्नी दोनों कोरोना संक्रमित हो गए और होम आइसोलेशन में रहे। बताया कि परिवार के अन्य सदस्यों ने उनकी हिम्मत बढ़ाई। आध्यात्म से जुड़े रहे। परिवार के सहयोग दोनों संकट से उबरे हैं।
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विवेक कालेज आफ लॉ में मनोविज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पुष्पा जोशी बताती हैं कि संकट काल में मानवीय मनोवृत्ति को संयमित बनाए रखना जरूरी है। कोरोना ऐसा ही काल है। ऐसे में व्यक्ति की सोच सकारात्मक रहनी जरूरी है। ऐसे माहौल में आध्यात्म बड़ा कारगर साबित होता है। परिवार ही व्यक्ति की सोच को पाजिटिव बनाता है। संकट में पुस्तक सहारा बन सकती है। परिवार संकट से उबरने का एक ही सहारा है। देश भी एक परिवार है। कोरोना से सकारात्मक सोच के साथ लड़ेंगे तथा जीतेंगे।
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