बिजनौर: अमानगढ़ वन रेंज में घूमता हाथियों का झुंड।
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अमानगढ़ में बनेगा बांस का जंगल
बिजनौर। अमानगढ़ वन रेंज अब बांस के पेड़ों से भी गुलजार होगा। बांस के जंगल हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ हाथियों के लिए भोजन भी उपलब्ध कराएंगे। बांस के पेड़ लगने से हाथी के भोजन में विविधता आएगी। वे गांवों की ओर रुख नहीं करेंगे। इसी सत्र में अमानगढ़ वन रेंज में बांस के पेड़ लगाए जाएंगे।
अमानगढ़ वन रेंज में हाथियों की हुकूमत चलती है। पिछले साल हुई गणना में अमानगढ़ वन रेंज में 65 हाथी मिले थे। इस बार इनकी संख्या बढ़कर 82 हो गई है। वन रेंज में हाथियों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। अमानगढ़ वन रेंज में जिम कार्बेट के हाथी भी आते जाते रहते हैं। इतनी बड़ी संख्या में रह रहे हाथियों के लिए खाने का भंडार चाहिए। इसके अलावा भोजन में विविधता भी होनी चाहिए। अमानगढ़ वन रेंज में वन्य संपदा की कोई कमी नहीं है। लेकिन फिर भी हाथी वनों से गांवों और खेतों की ओर चले ही जाते हैं और वहां गन्ना आदि खाते हुए नुकसान करते हैं।
हाथियों के भोजन में विविधता लाने के लिए वन विभाग अब अमानगढ़ वन रेंज में हाथी परियोजना के अंतर्गत बांस के पेड़ लगाएगा। बांस हाथी का बहुत ही प्रिय भोजन होता है। इसे वे बहुत ही चाव से खाते हैं। इसके अलावा एक बार कहीं पर बांस लगाने पर वह खुद ही विकसित होता है और धीरे धीरे वन का रूप ले लेता है। जंगल में पसंदीदा भोजन मिलने पर हाथी गांवों या खेतों की ओर कम रुख करेंगे। अमानगढ़ वन रेंज में बंदर भी बड़ी संख्या में हैं। बंदर भी बांस को बहुत चाव से खाते हैं।
जगह कर रहे चिह्नित : डीएफओ
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन का कहना है कि अमानगढ़ वन रेंज में बांस लगाने की योजना बनाई गई है। बांस के लगने से अमानगढ़ में हरियाली बढ़ेगी और हाथियों को भोजन भी मिलेगा। इसके लिए वन रेंज में जगह चिह्नित की जा रही है।