बास्टा। विकासखंड जलीलपुर की ग्राम पंचायत बसंतपुर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में नियमित रूप से चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों के नहीं पहुंचने से ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल अधिकांश समय बंद रहता है, जिससे मरीजों को 10 से 12 किलोमीटर दूर जलीलपुर या चांदपुर जाकर उपचार कराना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर में पिछले कई महीनों से नियमित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं। मरीज सुबह से शाम तक अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन ताला लटका मिलने पर उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। टीकाकरण, रक्तचाप और शुगर जांच के साथ-साथ सामान्य दवाओं के लिए भी लोगों को अन्य स्थानों का रुख करना पड़ रहा है। बसंतपुर, दरबड़, ठेट, हुसैनपुर खासा, बाकीपुर, औरंगपुर, जोगीपुरा आदि आसपास के गांवों की लगभग 10 हजार की आबादी इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों की मांग है कि बसंतपुर आयुष्मान आरोग्य मंदिर में नियमित डॉक्टर, एएनएम और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी योजना का लाभ लोगों तक पहुंच सके।
ग्रामीण अतर सिंह ने बताया कि चिकित्सक कभी-कभार ही आते हैं। दवा लेने आने वाले मरीजों को अस्पताल बंद मिलने पर वापस लौटना पड़ता है।
सचिन कुमार ने कहा कि लंबे समय से डॉक्टर नियमित नहीं आ रहे हैं, जिसके कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है।
हुसैनपुर खासा के ग्राम प्रधान चंद्रभान सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर नियमित नहीं आते, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं बसंतपुर के प्रधान पुत्र प्रशांत कुमार ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
सीएचसी स्याऊ के प्रभारी डॉ. जुबेर ने बताया कि संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) अवकाश पर हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर को नियमित रूप से संचालित कराया जाएगा।