संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। दुनिया आधुनिक परंपराओं को त्यागकर प्राचीन परंपरा की तरफ लौट रही है। आधुनिकता की अंधी दौड़ में इंसान को प्राकृतिक आपदा, बीमारी और प्रदूषण के अतिरिक्त कुछ नहीं मिला है। यह बात डीएम ने कही। उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर दिया।
कण्व ऋषि आश्रम में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन अंतर्गत कृषि केंद्र में एक दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। इसमें डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि कण्व ऋषि आश्रम को सुंदर बनाने के लिए पूर्वजों की स्मृति में कम से कम एक पौधा फूल, फल और औषधि का जरूर लगाएं। जिससे गंगा और मालन नदियों से होने वाला कटान रुकेगा। उन्होंने किसानों से कहा कि प्रतिभाओं, अनुभवों और योग्याताओं के बल पर जिला बिजनौर को देश और विदेश के लिए प्रेरणास्रोत बनाएं। जिससे प्राकृतिक खेती के स्वास्थ्य एवं आर्थिक लाभ से देश एवं दुनिया परिचित हो सके।
एसपी दिनेश सिंह ने कहा कि वैदिक काल से गाय, गोबर एवं गोमूत्र की महत्ता रही है। गाय के दूध, मूत्र एवं गोबर में जीवन के सूक्ष्म तत्व विद्यमान हैं। जिनका सदुपयोग कर वर्मी कंपोस्ट बनाकर अतिरिक्त आमदनी ली जा सकती है। गोमूत्र एवं गोबर का खाद के रूप में प्रयोग करने से जैविक खेती को प्राकृतिक ऊर्जा प्राप्त होगी तथा उत्पादन में भी भारी वृद्धि संभव हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरक के अंधाधुंध प्रयोग से धरती, जल और वायु अत्यंत जहरीली हो चुकी है। जिसका समाधान प्राकृतिक खेती से होगा। संचालन जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र ने किया। अफसरों ने प्राकृतिक खेती में नए आयाम देने वाले किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मनित किया गया। अध्यक्षता कर रहे सीडीओ पूर्ण बोरा, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन प्रतिनिधि स्मृति, डॉ. एके शुक्ला, उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र आदि मौजूद रहे।