मंडावली/नजीबाबाद। केदारनाथ की घाटी में बादल फटने की घटना के बाद आपदा क्षेत्र में मंडावली और गांव राहतपुर खुर्द के करीब 100 लोग फंसे हुए हैं। आपदा में फंसे लोगों को अपनों से मिलने के लिए रेस्क्यू अभियान का इंतजार है। आपदा में मंडावली निवासी शहजाद और भनेड़ा निवासी बुंदू नदी के उफान में बह गए थे, जिनका अब तक कोई सुराग नहीं लगा।
31 जुलाई को केदारनाथ की घाटी में बादल फटने की घटना के बाद हजारों लोग आपदा के बीच फंस गए। इन हजारों लोगों में जिला बिजनौर के गांव मंडावली और राहतपुर खुर्द के करीब 100 लोग भी आपदा क्षेत्र में फंसे हुए हैं। ये लोग केदारनाथ घाटी के कई स्थानों पर खच्चर से यात्रियों को यात्रा कराने, दुकानों पर सब्जी पहुंचाने सहित मक्का के भुट्टे बेचने का काम करते हैं।
गौरीकुंड से केदारनाथ जाने वाला पैदल मार्ग कई जगहों से क्षतिग्रस्त होने और मंदाकनी नदी पर बने पुल के टूटने से कई लोगों का एक-दूसरे से संपर्क कटा हुआ है। आपदा क्षेत्र में फंसे लोगों से फोन पर परिजनों की बात हुई। उन्हाेंने परिजनों को सकुशल होने की जानकारी दी। उन्होंने परिजनों को बताया कि आपदा क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान जारी है। जल्द ही उनके आपदा क्षेत्र से बाहर निकलने की उम्मीद है।
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सरफराज की आंखों के सामने बह गया भाई शहजाद
नजीबाबाद। केदारनाथ की घाटी में बादल फटने की घटना के बाद मंडावली निवासी सरफराज की आंखों के सामने उसका भाई शहजाद और भनेड़ा निवासी दोस्त बुंदू नदी के उफान में बह गया। सरफराज भी बाल-बाल बचा। सरफराज ने परिजनों को बताया कि बुधवार को केदारनाथ में बादल फटने की घटना हुई तो उस दौरान तीनों एक साथ थे। मंदाकनी नदी में तेज पानी आने के बाद उसने शोर मचाकर शहजाद और बुंदू को सतर्क होने के लिए कहा, जब तक वे नदी के तेज बहाव की चपेट में आ गए और दोनों नदी में बह गए। सरफराज लोहे की रेंलिंग के सहारे नदी में बहने से बच गया। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने उत्तराखंड प्रशासन के साथ उनकी तलाश की, लेकिन दोनों युवकों को कोई सुराग नहीं लगा। तीनों युवक मक्का के भुट्टे बेचने का कार्य करते थे।
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रोजगार के लिए केदारघाटी पर निर्भर है मंडावली और राहतपुर खुर्द के लोग
नजीबाबाद। मंडावली और राहतपुर खुर्द के युवक रोजगार के लिए केदारघाटी पर निर्भर हैं। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक युवक सब्जी पहुंचाने, जरूरी सामानों की फड़ व रेहड़ी लगाने और खच्चरों से लोगों को केदारनाथ के दर्शन कराने का काम करते हैं। केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने पर क्षेत्र के युवक वापस आ जाते हैं और केदारनाथ यात्रा शुरू होते ही फिर से काम पर पहुंच जाते हैं। मंडावली और राहतपुर खुर्द से बड़ी संख्या में युवक रोजगार के लिए केदारनाथ पहुंचे थे।
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परिजनों को याद आई वर्ष 2013 की केदारनाथ की आपदा
नजीबाबाद। 31 जुलाई को केदारनाथ में बादल फटने की सूचना मिलते ही आपदा में फंसे लोगों के परिजनों को वर्ष 2013 की तबाही का मंजर याद आया। वर्ष 2013 में केदारनाथ की आपदा ने पूरे देश को झकझोर दिया था। परिजनों ने अपने बच्चों से संपर्क किया। फोन पर सकुशलता की जानकारी मिलने पर परिजनों ने राहत की सांस ली।