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नदी में समा रहे खेत

Thu, 09 Feb 2017 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
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नजीबाबाद  में  बरसाती नदियों के कटान से नदी के किनारे खेती करने वाले किसान खासे परेशान हैं। प्रतिवर्ष खेतों के टूटकर नदी में समाने से अब तक कई किसान बर्बाद हो चुके हैं। सर्वे होने के बावजूद तटबंध न बनाने पर किसानों ने रोष जताया है। किसानों ने खेतों को नदियों में समाने से रोकने के लिए नदियों में अवैध खनन बंद कराने की मांग की है।
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नजीबाबाद क्षेत्र में मालन नदी से सटे गांव बीरूवाला, बड़िया, चंदनपुरा, लुकादड़ी, कल्हेड़ी सहित कई गांवों के किसान परेशान हैं। किसानों रिसाल सिंह, गुरबचन सिंह, मुबारक अली, सुरेश सिंह, जफर जैदी का कहना है कि उनके खेत मालन नदी से सटे हैं। प्रतिवर्ष वर्षाकाल में मालन नदी में आने वाले उफान से उनके खेतों में कटान होता है। अब तक उनकी कई बीघा जमीन टूटकर नदी में समा चुकी है। खेतों में कटान होने से बचाने के लिए भी किसी स्तर पर प्रयास नहीं किए जा रहे।
उधर, भागूवाला में कोटावाली नदी से सटे गांव कोटावाली और रामपुरचाठा के ग्रामीण भी खासे त्रस्त हैं। दशकों पहले से बसा गांव कोटावाली हाल ही के वर्षों में हुए कटान से उजड़ चुका है। ग्रामीण रामचंदर, नाथे, चंद्रो, संजीव, नरेश सहित करीब डेढ़ दर्जन परिवार नदी के दूसरे छोर पर कटान से बचने के लिए अस्थाई झोपड़ीनुमा मकान बनाकर रह रहे हैं। गांव में बना प्राथमिक विद्यालय कोटावाली नदी से महज अब 60 मीटर की दूरी पर रह गया है। गांव रामपुरचाठा निवासी किसानों भगीरथ, टीकाराम कहना है कि डेढ़ वर्ष कटान रोकने के लिए तटबंध निर्माण के लिए सर्वे हुआ था, लेकिन कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने कोटावाली नदी पर जरूरी स्थानों पर तटबंध बनवाने और नदी में हो रहे अवैध खनन को रुकवाने की मांग की है।
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