- मानक के अनुरूप साल्ट नहीं होने पर कैसे मिलेगा बीमारी में आराम
- चिकित्सक बोले, अधोमानक दवा से बीमारी ठीक होने के बजाए बढ़ेगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिले में एक और एंटीबायोटिक सिरप का नमूना जांच में अधोमानक पाया गया। डैक्सिलिन-सीवी सिरप में मानक के अनुरूप साल्ट नहीं मिलने पर नमूना अधोमानक पाया गया। इससे पहले भी कई दवाइयों के नमूने जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे है।
डैक्सिलिन-सीवी सिरप बच्चों को दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवा है। यह संक्रमण होने पर दी जाती है। औषधि निरीक्षक ने यह नमूना राजा का ताजपुर स्थित शमा मेडिकल स्टोर से लिया था। यह अल्ट्रा ड्रग्स प्राइवेट लिमिटेड मनपुरा बद्दी, सिलोन कंपनी की बनी है। डैक्सिलिन-सीवी सिरप में अमोक्सीसिलिन और पौटेशियम क्लैवुलैनेट दवा का मिश्रण है। इसमें जांच के दौरान जांच में पौटेशियम क्लैवुलैनेट मानक के अनुरूप नहीं मिला। असकी वजह से दवा जांच में अधोमानक पाई गई।
चिकित्सकों का कहना है कि अगर अधोमानक दवाई मरीज को दी जाए, तो उसकी बीमारी ठीक नहीं होगी। इससे मरीज की तबीयत सुधरने के बजाय बिगड़ जाएगी। मेडिकल अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र सिंह का कहना है कि बीमारी को पूरी तरह से ठीक करने के लिए दवाई ठीक होनी जरूरी है। अगर दवाई में मानक के अनुरूप साल्ट नहीं है तो वह असरदार नहीं होगी। इससे बीमारी बढ़ जाएगी।
इस साल इन दवाइयों के नमूने जांच में नहीं उतरे खरे
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार फरवरी में एंटीबायोटिक कैल्वाशड टेबलेट का नमूना जांच में फेल पाया गया। इसमें अमोक्सीसिलिन और पौटेशियम क्लैवुलैनेट का मिश्रण था। मार्च में रैबकस डीएसआर कैप्सूल और स्कोरैब-डीएसआर कैप्सूल का नमूना जांच में फेल आया है। अप्रैल में वेलसेफ-एलबी सीरप अधोमानक आया था।
डैक्सिलिन-सीवी सिरप का नमूना जांच में अधोमानक पाया गया है। अब कंपनी के खिलाफ वाद दायर करने की तैयारी चल रही है। जल्द ही वाद दायर करने की कार्रवाई की जाएगी। - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक, बिजनौर