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हर वर्ष बरसात में गंगा नदी से गौसपुर में सैकड़ों बीघा जमीन का होता है कटान

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गौसपुर में स्थायी तटबंध न बनाने से ग्रामीणों में रोष
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नांगलसोती/नजीबाबाद। एक दशक से भूमि कटाव का दंश झेल रहे गौसपुर के ग्रामीणों को इस वर्ष भी भूमि कटाव की समस्या से निजात नहीं मिली। प्रशासन के आश्वासन के बाद भी गांव में गंगा नदी किनारे स्थायी तटबंध नहीं बनाए गए। ग्रामीण कटान क्षेत्र में स्थायी स्टड बनवाने के लिए लगातार डीएम कार्यालय सहित प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
गंगा नदी ने पिछले 10 वर्षों में नांगलसोती क्षेत्र के गांव गौसपुर की सर्वाधिक कृषि भूमि का कटान किया है। गत वर्ष भी बरसात में किसानों की सैकड़ों बीघा खेत नदी के तेज बहाव में कट गई थी। कटान के कारण नदी से गांव की दूरी मात्र 50 मीटर दूर रह गई है। बरसात केे कारण प्रशासन द्वारा गौसपुर में कटान रोकने के लिए अस्थायी तटबंध बनवाए गए थे, लेकिन ये कटान नहीं रोक पाए।
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डीएम उमेश मिश्रा ने गत वर्ष जून में गौसपुर के कटान क्षेत्र का निरीक्षण किया था। उन्होंने ग्रामीणों को गौसपुर में स्थायी तटबंध बनाने के लिए सिंचाई विभाग के स्टीमेट को प्रशासन से मंजूरी मिलने की जानकारी दी थी। डीएम ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि कटान क्षेत्र में तटबंध बनाए जाएंगे, जिसका कार्य बरसात के बाद अक्तूबर व नवंबर में शुरू होगा, लेकिन आश्वासन के बाद भी कुछ नहीं हुआ। पूर्व प्रधान ऋषिपाल सिंह, ग्रामीण राज प्रसाद, मुन्नू सिंह, डॉ. वीरेंद्र सिंह, भूपेंद्र के हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन विपिन कुमार ने सोमवार को डीएम को सौंपा।
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सोशल मीडिया पर उठा रहे कटान निवारण का मुद्दा
गौसपुर के ग्रामीण लगातार गांव के कटान निवारण का मुद्दा सोशल मीडिया पर उठा रहे हैं। ग्रामीणों ने सोशल मीडिया पर गंगा कटान निवारण आंदोलन के नाम से एक ग्रुप भी बनाया है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और मीडियाकर्मियों को जोड़ा है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के विधायक से भी गौसपुर में भूमि कटाव की समस्या से निजात दिलाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन गांव की समस्या का निस्तारण नहीं हुआ।
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