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अमर उजाला अभियान : पुलिस की पाठशाला - अनजान से शेयर न करें निजी जानकारी

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बिजनौर में अमर उजाला की ओर से यूनिवर्सल एकेडमी में आयोजित पुलिस की पाठशाला में विचार रखते एएसपी स - फोटो : BIJNOR
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अमर उजाला अभियान : पुलिस की पाठशाला - अनजान से शेयर न करें निजी जानकारी
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बिजनौर। बदलते दौर में साइबर अपराध बढ़े हैं। जिससे बचने के लिए सतर्क रहना जरूरी है। निजी जानकारी को किसी के भी साथ शेयर न करें। ओटीपी मालूम कर साइबर अपराधी खाता खाली कर सकते हैं। ये बातें एएसपी सिटी डा. प्रवीन रंजन सिंह ने कहीं। छात्र छात्राओं को कानून की उपयोगिता और बारीकियों से अवगत कराया। वहीं सुरक्षा से लेकर सफलता तक का मंत्र एएसपी सिटी ने दिया।
शुक्रवार को यूनिवर्सल एकेडमी में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से पुलिस की पाठशाला का आयोजन हुआ। जिसका शुभारंभ एएसपी सिटी डॉ. प्रवीन रंजन सिंह, प्रधानाचार्य डॉ. अनुज त्यागी और उपप्रधानाचार्य खुशबू कर्णवाल ने मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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मुख्य अतिथि एएसपी सिटी डॉ. प्रवीन रंजन सिंह ने कहा कि कानून जीवन की सुरक्षा और संरक्षा के लिए बनाया गया, जिसके पालन का दायित्व पुलिस को सौंपा गया। समाज में शांति बनाए रखने के लिए कानून का डर जरूरी है। शांति नहीं रहेगी तो विकास नहीं होगा। उन्होंने यातायात के नियमों की जानकारी दी। इसके अलावा साइबर अपराध को लेकर जागरुक किया। बताया कि साइबर अपराध से बचने के लिए सोशल मीडिया पर सतर्क रहना होगा। वहीं छात्र छात्राओं की जिज्ञासाओं को शांत किया। विद्यार्थियों के सवालों का एएसपी सिटी ने जवाब दिया। सुमन रावत ने संचालन किया। इकरा परवनी का भी सहयोग रहा।
छात्राआें के सवाल, एसपी सिटी के जवाब
साक्षी चौधरी - सिविल सर्विस की परीक्षा को कैसे पास करें?
जवाब- खुली आंखों से सपने देखकर लक्ष्य निर्धारित करें। लक्ष्य प्राप्ति के लिए समर्पण जरूरी है। दिखाने के लिए आठ घंटे मत पढ़ो, चार घंटे ही पढ़ो लेकिन मन से पढ़ो। तभी सफल हो सकोगे।
दिव्यांशु - एफआईआर झूठी है या सही, कैसे तय होता है।
जवाब - किसी घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट थाने में दर्ज होती है। फिर विवेचना में घटना का सत्य या असत्य होना निर्धारित किया जाता है। झूठी सूचना पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी जाती है। जबकि सही में आरोप पत्र दाखिल कर दिया जाता है।
जीविका- छोटे अधिकारी या कर्मचारी गैरकानूनी काम करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई के मौके कम क्यों होते हैं।
जवाब- ऐसा नहीं है, उनसे बड़े अधिकारी संज्ञान लेते हैं। अगर साक्ष्य मजबूत हों तो कोई भी कार्यवाही से बच नहीं सकता। हालांकि कार्यवाई के लिए एक प्रक्रिया होती है। उसी अनुसार आरोप सही पाए जाने पर दंड दिया जाता है।
खुशी - आम आदमी की मानसिकता होती है कि कोई भी काम बिना पैसे नहीं होता।
जवाब- अधिकारों की अज्ञानता से यह धारणा बनी हुई है। लेकिन यह धारणा अब खत्म हो रही है। थानों में अगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है तो उच्च अधिकारियों को अवगत कराएं। पांच सालों में एक भरोसा दिला पाए हैं कि 112 पर कॉल करने से पुलिस जरूर पहुंचती है।
आंचल - परीक्षा की तैयारी के लिए समय प्रबंधन कैसे करें।
जवाब- प्राथमिकता पहले तय करके समय का प्रबंधन करें। किस विषय पर कितना समय देना है, यह समय सारिणी बनाएं। कोई दूसरा आपके समय का प्रबंधन नहीं कर सकता है। खुद के हालातों के अनुसार ही समय निकालें।
अंशिका - लड़कियों को अभिभावक पुलिस की नौकरी से मना क्यों करते हैं।
जवाब- दरअसल पुलिसिंग का काम 24 घंटे का होता है, अपने लिए कोई समय नहीं होता। वर्दी पहन लेने के बाद समाज के लिए समर्पित होना पड़ता है। अब हालात बदल रहे हैं। लड़कियां अब पुलिस की नौकरी को पंसद कर रही हैं।
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पावनी- सिविल सर्विस में जाने के लिए किस विषय को अपनाएं।
जवाब- आपकी रुचि किसमें है, खुद को तय करना है। विषय का चयन बहुत बड़ा निर्णय है। जिस विषय का भी चयन करें, उसके मास्टर बनें, मजबूत पकड़ होनी चाहिए।
हर्षिता - किस प्रेरणा के साथ क्षेत्र का चयन करें।
जवाब- प्रेरणा लेकर सार्थक प्रयास करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। किस क्षेत्र में जाना है, यह तो खुद की रुचि पर तय करना होता है। ईमानदारी से प्रयास करने पर ही लक्ष्य मिल सकेगा।
प्रज्ञा - कहीं आते जाते असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।
जवाब- सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए 1090 हेल्पलाइन जारी कर रखी है। जिस पर शिकायत करने पर पहचान भी गुप्त रखी जाती है। गलत सहो मत, मुंह खोलो और कहो।
खुशबू कर्णवाल - मिस्ड कॉल और गलत मेसेज का क्या हल है।
जवाब- साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराने से समस्या का निदान हो जाता है। अब साइबर थाने भी खुल रहे हैं।
सलोनी - मानवाधिकार में पुलिस की क्या भूमिका है।
जवाब - मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कानून बना है। कानून का पालन कराने की भूमिका पुलिस की है।
अलफिशा - आपने कैसे तय किया कि पुलिस में जाना है।
जवाब - वह भी शिक्षक के बेटे हैं, बारहवीं करने के बाद तय कर लिया था कि पुलिस अफसर बनना है।
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