अमर उजाला अभियान : डॉर्क जोन से सामान्य श्रेणी में आए तीन ब्लॉक
बिजनौर। जिले में भूजल प्रबंधन का असर दिखाई देने लगा है। पानी की बर्बादी रुकी है, बरसाती पानी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जमीन में जाने लगा। इससे डार्क जोन के तीन ब्लॉक सामान्य श्रेणी में आ गए हैं। प्रशासन लोगों को पानी की बर्बादी रोकने के लिए जागरूक करने में लगा है।
जिले में 11 ब्लॉक हैं। गांवों में अंधाधुंध जल दोहन से भू गर्भ जल स्तर में गिरावट आई, जिससे नूरपुर, नहटौर, स्योहारा तथा जलीलपुर ब्लॉक डार्क जोन में आ गए थे। इन ब्लॉकों को सामान्य श्रेणी में लाने तथा भूमिगत जल स्तर बढ़ाने के लिए जल शक्ति अभियान चला। इसके अंतर्गत सरकारी बोरिंग बंद किए जाने समेत कई पाबंदियां लगाई गईं। शासन के जल संकट से उबरने के प्रयास रंग लाए। जिससे नूरपुर, नहटौर तथा स्योहारा ब्लॉक डार्क जोन से सामान्य श्रेणी में आ गए हैं। अब केवल जलीलपुर ब्लॉक ही डार्क जोन में है। किसानों को अंधाधुंध जल दोहन के दुष्परिणामों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए चिह्नित 3534 सरकारी भवनों में से 3000 भवनों में सिस्टम लग गए हैं।
भूमिगत जल स्तर बढ़ाने के 10 बिंदु
1- राजकीय व शिक्षण संस्थाओं के भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना।
2- कृषि सिंचाई के ड्रिप सिस्टम को प्रोत्साहन।
3- कंपनियों को भूजल प्रबंधन एक्ट के अंतर्गत अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य।
4- गांवों में जल संचयन के लिए तालाबों का जीर्णोद्धार व निर्माण।
5- नगरपालिका क्षेत्र में मकान निर्माण के लिए जल रिचार्ज सिस्टम की व्यवस्था करना।
6- डार्क जोन ब्लॉक में सरकारी बोरिंग पर पाबंदी।
7- डार्क जोन में नए नलकूप बिजली कनेक्शनों की मंजूरी पर रोक।
8- खेतों में वर्षा जल या सिंचाई के पानी को रोकने के लिए मेड़बंदी।
9- तालाबों की साफ सफाई।
10- 300 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के मकान में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनिवार्यता।
लघु सिंचाई विभाग को नहीं मिला बजट
भू गर्भ जल स्तर बढ़ाने का प्राकृतिक स्रोत वर्षा का जल है। वर्षा जल के संचयन के लिए शासन की गांवों में तालाबों का जीर्णोद्धार व नया तालाब निर्माण करने की योजना है। शासन के आदेश हैं कि एक हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाले तालाबों का निर्माण पंचायत से कराया जाएगा। जबकि एक हेक्टेयर से पांच हेक्टेयर रकबे तक के तालाबों का निर्माण लघु सिंचाई विभाग कराएगा। लघु सिंचाई विभाग को तालाब निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 में कोई बजट नहीं मिला है। जिस कारण नए तालाब निर्माण का कार्य आगे नहीं बढ़ा।
लोगों को किया जा रहा है जागरूक
सीडीओ केपी सिंह ने बताया कि भू गर्भ जल स्तर बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम हो रहा है। गांवों में गोष्ठी करके लोगों को अत्यधिक जल दोहन नहीं करने की सलाह दी जा रही है। पंचायतों में करीब 350 तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया है। 17 नए तालाब बने हैं। आदर्श तालाब निर्माण योजना पर काम हुआ है। लघु सिंचाई विभाग, पंचायत राज आदि विभागों को केंद्र की भू जल प्रबंधन की गाइडलाइंस पर अमल करने के निर्देश हैं।