देश के बाकी जगहों के साथ बिजनौर जिले में भी कोरोना महामारी ने हाहाकार मचा दिया था। दूसरी लहर के बाद कोरोना से बचाव के लिए सरकार ने सभी जगह कोरोनारोधी टीकाकरण में तेजी लाने के निर्देश दिए, जिसका प्रभाव नियमित टीकाकरण पर पड़ा। कोरोना काल में ज्यादातर बूथों पर केवल कोरोना वैक्सीनेशन ही किया गया। इसी कारण कोरोना काल में छूटे हुए बच्चों सहित अन्य को अब नियमित टीका लगाया जा रहा है।
जिले में कोरोना काल का असर नियमित टीकाकरण पर पड़ा। इस दौरान किसी भी बच्चे को टीका नहीं लगाया गया, जबकि कुछ टीके जन्म और कुछ टीके एक महीने के अंतर पर लगाए जाते हैं। कोरोना काल में छूटे हुए बच्चों को टीका लगाने के लिए ही संघन मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसका पहला सत्र 7 मार्च को लगा, जिसमें 26887 बच्चों और 7442 गर्भवती महिलाओं को टीका लगाया गया।
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इसके साथ ही अब 4 अप्रैल को इस कार्यक्रम का दूसरा सत्र शुरू होगा, जिसमें 27 हजार बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम में बच्चों को 10 बीमारियों के टीके लगाए जाएंगे, जिसमें पोलियो, गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, एचआईबी, हैपेटाइटस बी, रोटा वायरस, खसरा, रुबेला, दिमागी टीबी शामिल है।
पोलियो का टीका
पोलियो के लिए बच्चों को एफआईपीबी का पहला टीका डेढ़ माह पर लगाया जाता है। इसके बाद साढ़े तीन माह पर दूसरी डोज लगाई जाती है। साथ ही 16 से 18 महीने बाद बूस्टर डोज लगाई जाती है। टीका न लगने पर बच्चे में पोलियो होने का खतरा बढ़ जाता है। यह बच्चों में पोलियो के खतरे को कम करता है।
पांच बीमारी, टीका एक
गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, एचआईबी और हैपेटाइटस-बी का एक ही टीका पेंटावैलेंट लगाया जाता है। जो डेढ़ माह के बच्चे को पहला टीका लगता है।
टीका लगवाने से बच्चे का इन पांच बीमारियों से बचाव होता है।
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रोटा वायरस से बचाता है टीका
रोटा वायरस वैक्सीन डेढ़ महीने के बच्चे को लगाई जाती है। यह बच्चे को डायरिया से काफी हद तक बचाव करता है। यह वैक्सीन लगवाने से बच्चे में डायरिया की समस्या कम हो जाती है।
खसरा को रखता है दूर
खसरा, रुबेला से बचाव के लिए बच्चे को एमआर (मिजंलस और रुबेला) वैक्सीन लगाई जाती है। जो 9 महीने के बच्चे को लगती है। वैक्सीन न लगने पर बच्चे में खसरा और रुबेला होने का खतरा बढ़ जाता है।
बीसीजी का टीका जरूरी
दिमागी टीबी के लिए बच्चे को बीसीजी टीका लगाया जाता है। यह टीका जन्म के समय ही लगता है। बीसीजी टीका लगने से बच्चों में दिमागी टीबी का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। इसलिए यह टीका जन्म के समय ही लगाया जाता है।
छूटे बच्चों का होगा नियमित टीकाकरण: डॉ.अशोक कुमार
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि कोरोना काल में नियमित टीकाकरण काफी हद तक प्रभावित हुआ है। सभी एएनएम और आशाओं को कोरोना वैक्सीनेशन में लगा दिया गया था, जिसके चलते जिले में नियमित टीकाकरण बहुत कम हुआ था। कोरोना काल में छूटे हुए बच्चों को पूरा करने के लिए संघन मिशन इंद्रधनुष चलाया गया है।