बिजनौर। प्रॉपर्टी डीलर सुशील चौधरी की हत्या में शनिवार को अदालत ने फैसला सुनाया है। अपर जिला जज निजेंद्र कुमार की अदालत ने साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया और दोषमुक्त करने का आदेश सुनाया।
मुन्नूपुरम कॉलोनी निवासी सुशील चौधरी की 29 मई 2024 को उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह अपने कार्यालय से घर लौट रहे थे। सेंट मेरिज चौराहे से आगे एक निजी अस्पताल के पास बाइक सवार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। गंभीर रूप से घायल सुशील को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। वह जिला पंचायत सदस्य संजीव मलिक के साले थे। पुलिस की जांच में सामने आया था कि चांदपुर रोड स्थित करीब साढ़े नौ बीघा जमीन के सौदे को लेकर करीब चार करोड़ रुपये में मौखिक समझौता हुआ था। आरोपियों की ओर से 40 लाख रुपये एडवांस दिए गए थे, लेकिन समयसीमा पूरी होने के बाद रकम वापसी या बैनामे को लेकर विवाद गहरा गया और रंजिश बढ़ गई। पुलिस जांच में कहा गया था कि आरोपी हसीन के भांजे फैजान ने मेरठ के एक शूटर को ढाई लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या कराई। घटना के पांच दिन बाद पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया था।
मामले में फैजान, केशव, शालिक, अजीज, हसीन, नईमुद्दीन, वसीम, अर्नब तोमर, अतुल चौधरी और शुभम चौधरी के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा चला। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया।