रामगंगा बांध के बढ़ते जल स्तर पर अलर्ट जारी
स्योहारा। रामगंगा बांध के बढ़ते जल स्तर के कारण जहां एक ओर क्षेत्र में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं दूसरी ओर रामगंगा नदी के बहाव क्षेत्र व खादर इलाके में दबंगों के कब्जे और खेती के चलते नदी का व्यापारिक मार्ग अपना अस्तित्व खो बैठा। 1960 के दशक में जब रामगंगा बांध का निर्माण किया गया था। उस समय हरेवली के बैराज से होकर 5 लाख क्यूसेक पानी इस नदी में चला करता था।
स्योहारा क्षेत्र के जोतहिम्मा, मुकरपुरी, सिपाहीवाला, टांडा, बेरखेड़ा आदि में रामगंगा नदी में खो नदी, फीका नदी, बनैली नदी आदि का संगम है। यहां नदियों का बहाव तीन किमी से भी अधिक भूमि में था। तब नदियों की क्षमता 5 लाख क्यूसेक से भी अधिक थी है लेकिन 50 वर्ष में यह नदी अस्तित्व खो बैठी। नदी के वास्तविक बहाव क्षेत्र में अवैध कब्जे कर गन्ने आदि की खेती की जा रही है। यहां रामगंगा नदी पर 600 मीटर लंबा पुल बना है। अब पुल के लंबाई में से मात्र 50 मीटर को छोड़कर शेष पर अवैध खेती हो रही है और नदी अब नाला बनकर रह गयी है। अब जब भी कालागढ़ के डैम से 5 से 10 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है तो सिपाहियों वाला के निकट अनेकों गांवों की भूमि जलमग्न हो जाती है। प्रतिवर्ष कालागढ़ के डैम से नदियों की सफाई और बहाव क्षेत्र को सुचारू बनाने के लिए बार चेतावनी जारी की जाती हैं, परंतु यह सिर्फ कागजी घोषणा ही साबित होती है। 2010 में आई बाढ़ के चलते क्षेत्र की जनता ने इसका खामियाजा भुगता था।